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भारत-नेपाल सीमा के रोशाल क्षेत्र के विद्यार्थियों को कब मिलेगी 'विद्या वाहिनी परिवहन सुविधा की मांग को लेकर जिलाधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन
चम्पावत। भारत-नेपाल सीमा से सटे महाकाली नदी के किनारे बसे सीमांत रोशाल क्षेत्र के स्कूली बच्चों के लिए परिवहन सुविधा की मांग अब तेज हो गई है। बुधवार को पूर्व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिलोक सिंह सामंत एवं वर्तमान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रकांत तिवारी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी चम्पावत को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए 'विद्या वाहिनी' अथवा अन्य स्कूल परिवहन वाहन संचालित किए जाने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि रोशाल क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन लंबी दूरी तक दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलकर विद्यालय पहुंचना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह सफर और अधिक कठिन और जोखिमभरा हो जाता है। छोटे-छोटे बच्चे जान जोखिम में डालकर शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यालय पहुंचते हैं, जिससे अभिभावकों में भी चिंता बनी रहती है।
पूर्व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिलोक सिंह सामंत ने कहा
जनपद चम्पावत के कई क्षेत्रों में सरकार ने स्कूली बच्चों के लिए 'विद्या वाहिनी' जैसी परिवहन सुविधा शुरू की है, जिससे बच्चों को सुरक्षित विद्यालय पहुंचने में सहायता मिल रही है। लेकिन भारत-नेपाल सीमा से लगे रोशाल क्षेत्र के बच्चों को आज तक यह सुविधा नहीं मिल सकी। आखिर सीमांत क्षेत्र के बच्चों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? क्या हमारे बच्चों को सुरक्षित शिक्षा का अधिकार नहीं है? हमने जिलाधिकारी से मांग की है कि रोशाल क्षेत्र में भी तत्काल परिवहन सुविधा शुरू की जाए।
वर्तमान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रकांत तिवारी ने कहा
सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन जब सीमांत क्षेत्र के बच्चे रोज़ कठिन पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलकर विद्यालय जाने को मजबूर हों तो यह चिंता का विषय है। यदि जनपद के अन्य क्षेत्रों में 'विद्या वाहिनी' चलाई जा सकती है तो रोशाल क्षेत्र के विद्यार्थियों को इससे वंचित क्यों रखा गया है? हम चाहते हैं कि प्रशासन समानता के आधार पर यहां भी स्कूली परिवहन की व्यवस्था करे।
उत्तराखंड आंदोलनकारी एवं राज्य दर्जा मंत्री हुकम सिंह कुंवर ने कहा
सीमांत क्षेत्रों का विकास केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। भारत-नेपाल सीमा पर रहने वाले बच्चों को भी वही सुविधाएं मिलनी चाहिए जो जिले के अन्य क्षेत्रों में उपलब्ध हैं। यदि दूसरे क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए परिवहन व्यवस्था की जा सकती है, तो रोशाल क्षेत्र के बच्चों को इससे वंचित रखना उचित नहीं है। प्रशासन को इस मांग पर गंभीरता से शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
क्षेत्र की जनता ने रखी अपनी पीड़ा
ग्रामीणों ने कहा कि जनपद चम्पावत के कई इलाकों में स्कूली बच्चों के लिए 'विद्या वाहिनी' संचालित की गई है, लेकिन सीमांत रोशाल क्षेत्र के बच्चे आज भी प्रतिदिन लंबी दूरी पैदल तय कर विद्यालय पहुंचते हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या सीमांत क्षेत्र के बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है? उनका कहना है कि शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों का समान है, इसलिए परिवहन सुविधा भी सभी विद्यार्थियों को समान रूप से मिलनी चाहिए। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्रवासी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को विवश होंगे।
तलवारों के साए में इतिहास हमारा बनता है, जिस ओर जवानी चलती है उस ओर ज़माना चलता है।
लेकिन भारत-नेपाल सीमा पर बसे रोशाल क्षेत्र की यह जवानी आज भी कंधों पर बस्ता लटकाए दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलने को मजबूर है। जब जनपद चम्पावत के कई क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए 'विद्या वाहिनी' संचालित की जा सकती है, तो आखिर सीमांत रोशाल क्षेत्र के बच्चों के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों? क्या जिलाधिकारी को सौंपे गए इस ज्ञापन के बाद इन बच्चों को भी समान अधिकार और सुरक्षित विद्यालय पहुंचने की सुविधा मिलेगी, या फिर उनकी उम्मीदें एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाएंगी
न्यूज़ रिपोर्टर एवं एडिटर:
पुष्कर सिंह राजपूत
PSR उत्तर ध्वनि न्यूज़