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सीमांत क्षेत्र के स्कूली बच्चों को परिवहन सुविधा दिलाने के लिए पूर्व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिलोक सिंह सामंत व वर्तमान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रकांत तिवारी ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
चम्पावत। भारत-नेपाल सीमा से लगी महाकाली नदी के किनारे बसे सीमांत सुल्ला–पासम क्षेत्र के स्कूली बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्या अब जिला प्रशासन तक पहुंच गई है। वर्षों से परिवहन सुविधा के अभाव में छात्र-छात्राएं प्रतिदिन लगभग 18 से 20 किलोमीटर का कठिन और जोखिम भरा सफर तय कर राजकीय इंटर कॉलेज रोशाल पहुंचने को मजबूर हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर पूर्व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिलोक सिंह सामंत तथा वर्तमान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रकांत तिवारी ने जिलाधिकारी चम्पावत एवं मुख्य शिक्षाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए सुल्ला–पासम से राजकीय इंटर कॉलेज रोशाल तक नियमित टैक्सी सेवा अथवा अन्य उपयुक्त परिवहन सुविधा तत्काल शुरू करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि विद्यालय तक जाने वाला मार्ग कई स्थानों पर जंगल और सुनसान क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे में विशेष रूप से छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में लगातार चिंता बनी रहती है। परिवहन सुविधा के अभाव में कई विद्यार्थी समय पर विद्यालय नहीं पहुंच पाते, जबकि कुछ अभिभावक मजबूरी में अपने बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए विद्यालय भेजने से भी हिचकिचाते हैं। इससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
क्या बोले पूर्व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिलोक सिंह सामंत
पूर्व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिलोक सिंह सामंत ने कहा कि सीमांत क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन इतना लंबा और जोखिम भरा सफर तय करना पड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है तो सबसे पहले बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे सीमांत क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। प्रशासन को इस पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
क्या बोले वर्तमान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रकांत तिवारी
वर्तमान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रकांत तिवारी ने कहा कि यह केवल परिवहन का मामला नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य का विषय है। उन्होंने कहा कि कई अभिभावक दूरी और असुरक्षित रास्ते के कारण बच्चों को विद्यालय भेजने में असहज महसूस करते हैं। यदि शीघ्र परिवहन सुविधा शुरू की जाती है तो विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी और सीमांत क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यार्थियों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शीघ्र कार्रवाई की जाए, ताकि महाकाली किनारे बसे सीमांत गांवों के बच्चों को भी सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा मिल सके।
18, 20 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचने को मजबूर सीमांत क्षेत्र के विद्यार्थी, परिवहन सुविधा की मांग को लेकर पूर्व ग्राम प्रधान प्रतिनिधि त्रिलोक सिंह सामंत व वर्तमान ग्राम प्रधान प्रतिनिधि चंद्रकांत तिवारी ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन।
रिपोर्टर : पुष्कर सिंह राजपूत
मुख्य संपादक : पुष्कर सिंह राजपूत
PSR उत्तर ध्वनि न्यूज़ | चम्पावत