🔊
आवाज़ हमारी संघर्ष हमारा, अब सुविधा हुई साकारलेकिन श्रेय ले रहा कोई और! उड़ान विद्या वाहिनी कार्यक्रम से दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों को मिली सुरक्षित वाहन सुविधा, वर्ष 2020 में उठाई गई मांग अब जाकर हुई पूरी
चम्पावत। सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में होने वाली परेशानियों को लेकर वर्ष 2020 के कोरोना काल में उठाई गई आवाज अब जाकर रंग लाती दिखाई दे रही है। लंबे समय से उठाई जा रही मांग और जनहित के संघर्ष के बाद अब परिवहन विभाग की ओर से उड़ान विद्या वाहिनी कार्यक्रम के तहत दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित वाहन सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि क्षेत्र में अभी रोडवेज की बस सेवा संचालित नहीं हो रही है। वर्तमान में परिवहन विभाग की ओर से विद्यार्थियों की सुविधा के लिए वाहन संचालित किए गए हैं, ताकि दूर-दराज और सीमांत क्षेत्रों के बच्चों को विद्यालय आने-जाने में राहत मिल सके।
वर्ष 2020 के कोरोना काल के दौरान सीमांत क्षेत्र के छात्र-छात्राओं और आम जनता की परिवहन समस्याओं को सबसे पहले प्रमुखता से उठाया गया था। उस समय यह सवाल सामने रखा गया था कि दूरस्थ गांवों के बच्चों को विद्यालय पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। नियमित और सुरक्षित वाहन सुविधा के अभाव में छात्र-छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इस जनसमस्या को लेकर लगातार आवाज उठाई गई और क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित परिवहन सुविधा की मांग की गई। इसके बाद उत्तराखंड क्रांति दल के नेताओं ने भी इस मुद्दे को आगे बढ़ाया और विद्यार्थियों के हित में आवाज बुलंद की।
अब वर्षों बाद उड़ान विद्या वाहिनी कार्यक्रम के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों को वाहन सुविधा मिलना निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि और राहत की खबर है। इससे विद्यार्थियों को विद्यालय आने-जाने में सुविधा मिलेगी और अभिभावकों की चिंता भी कम होगी।
लेकिन इस उपलब्धि के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है
आवाज़ सबसे पहले किसने उठाई और आज उसका श्रेय कौन ले रहा है
क्षेत्र में चर्चा है कि जिस मुद्दे को वर्ष 2020 में सबसे पहले उठाया गया, जिस समस्या को लगातार जनहित से जोड़कर जनता और प्रशासन के सामने रखा गया और जिसके बाद अन्य सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों ने भी समर्थन दिया, आज उसी उपलब्धि का श्रेय कुछ अन्य लोग लेने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी जनहित के संघर्ष में बाद में जुड़ने वाले लोगों का योगदान अपनी जगह महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन संघर्ष की शुरुआत करने वाले और मुद्दे को पहली बार प्रमुखता से उठाने वालों की भूमिका को भुलाया नहीं जाना चाहिए।
लोगों का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति या संगठन की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों से उठाई जा रही जनआवाज और सामूहिक प्रयास का परिणाम है। लेकिन यदि किसी ने सबसे पहले इस समस्या को उठाया और लगातार उसे जनता तथा प्रशासन के सामने रखा, तो उसके संघर्ष और योगदान का सही उल्लेख होना भी जरूरी है।
2022 में मिले मोबाइल-टैब, फिर इसके बाद विद्यार्थियों को क्यों नहीं मिला लाभ
स्कूली छात्र-छात्राओं की सुविधाओं की चर्चा के बीच वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के छात्र छात्राओं को दिए गए मोबाइल टैब का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उस समय विद्यार्थियों को शिक्षा और डिजिटल सुविधा के उद्देश्य से मोबाइल-टैब उपलब्ध कराए गए थे। लेकिन इसके बाद आज तक इस प्रकार की सुविधा दोबारा नहीं दी गई और न ही आगे की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आई।
ऐसे में क्षेत्र की जनता सवाल उठा रही है कि यदि मोबाइल-टैब योजना विद्यार्थियों की शिक्षा, ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल संसाधनों को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी, तो इसके अगले चरण को आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया इसके बाद पढ़ने वाले अन्य पात्र छात्र-छात्राओं को इस योजना का लाभ कब मिलेगा
लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या चुनाव के समय मोबाइल टैब का वितरण केवल एक विशेष पहल थी या फिर इसे विद्यार्थियों के लिए लंबे समय तक चलने वाली शैक्षिक योजना के रूप में आगे बढ़ाया जाना था
जनता यह भी जानना चाहती है कि मोबाइल-टैब वितरण के लिए किन छात्र-छात्राओं को पात्र माना गया था, कितने विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला और इसके बाद योजना को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि यह एक निरंतर चलने वाली शैक्षिक योजना थी, तो सरकार और संबंधित विभाग को इसकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए कि भविष्य में छात्र छात्राओं को मोबाइलटैब का लाभ कब और किस प्रकार दिया जाएगा।
लोगों का सवाल है
क्या मोबाइल टैब वितरण केवल चुनाव के समय तक सीमित पहल थी, या फिर विद्यार्थियों की शिक्षा और डिजिटल भविष्य को मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई योजना
इस संबंध में सरकार और संबंधित विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो सके।
सफेद वाहनों के संचालन और नियमों पर भी स्पष्टता जरूरी
उड़ान विद्या वाहिनी कार्यक्रम के तहत संचालित किए जा रहे वाहनों को लेकर भी क्षेत्र में सवाल उठ रहे हैं। यदि सफेद रंग के वाहनों से केवल स्कूली छात्र-छात्राओं को विद्यालय लाने ले जाने की व्यवस्था की जा रही है, तो परिवहन विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन वाहनों का संचालन किस श्रेणी और किस नियम के अंतर्गत किया जा रहा है।
लोगों ने मांग की है कि वाहन सुविधा के साथ-साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा, वाहनों की वैधानिक स्थिति, चालक की पात्रता, आवश्यक सुरक्षा उपकरण और अन्य निर्धारित मानकों का भी पूरा पालन सुनिश्चित किया जाए।
जनता की मांगसंघर्ष का इतिहास भी सामने आए और सुविधाओं का विस्तार भी हो
क्षेत्रवासियों ने कहा कि उड़ान विद्या वाहिनी कार्यक्रम के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों को सुरक्षित वाहन सुविधा मिलना सराहनीय पहल है। लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि इस सुविधा के लिए वर्ष 2020 से उठाई गई जनआवाज और संघर्ष के वास्तविक इतिहास को भी सामने रखा जाए।
साथ ही वर्ष 2022 में विद्यार्थियों को दिए गए मोबाइल-टैब की योजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए और आगे पात्र छात्र-छात्राओं को इसका लाभ देने के संबंध में भी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
जनता का सवाल हैजब आवाज वर्ष 2020 में उठाई गई, संघर्ष वर्षों तक चला और अब जाकर विद्यार्थियों को सुरक्षित वाहन सुविधा मिली, तो फिर इस उपलब्धि का पूरा श्रेय कोई और कैसे ले सकता है
मडलक क्षेत्र के आवाज उठाई गई थी सेलपेडू के सभी युवाओं द्वारा सभी युवाओं ओर यह वक्त के जनप्रतिनिधियों द्वारा ओर रोसाल क्षेत्र के जनप्रतिनिधि तिलोग सिंह सामंत यह वक्त के कई ग्राम प्रधान सामाजिक कार्यकर्ता पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्कर सिंह बोहरा ग्राम प्रधान भुवन भट्ट ग्राम प्रधान गणेश सिंह बोहरा ग्राम प्रधान प्रतिनिधि प्रेम सिंह सामाजिक कार्यकर्ता उप ग्राम प्रधान रमेश चंद डूंगरा लेटी आदि
आवाज़ हमारी थी, संघर्ष हमारा था और अब जाकर सुविधा साकार हुई है। विद्यार्थियों को मिली सुरक्षित वाहन सुविधा का स्वागत है, लेकिन जनहित के संघर्ष का सही इतिहास भी जनता के सामने आना चाहिए।