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दो डीएम, दो पटवारियों के निरीक्षण के बाद भी नहीं मिला आशियाना, अब नए सर्वे के आदेश पर उठे सवाल आपदा प्रभावित परिवारों का सवालक्या इस बार होगा जमीनी निरीक्षण या फिर आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे?
लोहाघाट। चम्पावत।
आपदा की चपेट में आए मकानों के प्रभावित परिवारों का दर्द एक बार फिर सामने आया है। प्रभावितों का कहना है कि पूर्व में दो जिलाधिकारियों तथा दो पटवारियों द्वारा मौके का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया कि आपदा के कारण मकान असुरक्षित हो चुके हैं और उन्हें नए मकान उपलब्ध कराए जाएंगे।
ग्रामीणों के अनुसार, उनका नाम सर्वे सूची में भी शामिल किया गया था, लेकिन बाद में वर्तमान ग्राम प्रधान के कार्यकाल में उनका नाम सूची से हटा दिया गया। इससे पात्र परिवार आज भी सरकारी सहायता और आवास योजना के लाभ से वंचित हैं।
अब जिला प्रशासन द्वारा पुनः पात्र लोगों का सर्वे कराने के आदेश जारी किए गए हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों के बीच उम्मीद के साथ-साथ संशय भी बना हुआ है। उनका कहना है कि सवाल केवल आदेश जारी होने का नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन का है।
ग्रामीण पूछ रहे हैं कि क्या इस बार अधिकारी वास्तव में मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष निरीक्षण करेंगे और वास्तविक पात्रों को न्याय मिलेगा, या फिर यह सर्वे भी पूर्व की तरह केवल सरकारी फाइलों और कागजों तक ही सीमित रह जाएगा?
प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सर्वे पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कराया जाए तथा जिन लोगों के मकान वास्तव में आपदा की चपेट में आए हैं, उन्हें नियमानुसार आवास का लाभ दिलाया जाए।
> नोट: यह समाचार प्रभावित परिवारों द्वारा किए गए दावों और उठाए गए सवालों पर आधारित है। संबंधित पक्ष का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।