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बद्रीनाथ धाम के राजपुरोहित से खास बातचीत: जानिए तप्त कुंड, ब्रह्मकपाल और पितृ मोक्ष का सनातन रहस्य
बद्रीनाथ धाम (चमोली)। PSR उत्तर ध्वनि न्यूज़ की टीम ने विश्व प्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम में राजपुरोहित से विशेष बातचीत कर धाम की धार्मिक, पौराणिक और आध्यात्मिक महत्ता से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान राजपुरोहित ने तप्त कुंड, ब्रह्मकपाल और पितृ कर्मों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
राजपुरोहित ने बताया कि भगवान श्री बद्री विशाल के दर्शन से पहले श्रद्धालु तप्त कुंड में स्नान करते हैं। यह प्राकृतिक गर्म जल का पवित्र कुंड है, जहां स्नान करने से श्रद्धालु स्वयं को शुद्ध मानते हैं और इसके बाद भगवान के दर्शन करते हैं। बर्फीले वातावरण के बीच इस कुंड का गर्म जल श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आश्चर्य का केंद्र है।
उन्होंने बताया कि मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित ब्रह्मकपाल सनातन धर्म में पितृ कर्मों के लिए सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव द्वारा ब्रह्मा जी का एक कपाल अलग किए जाने के बाद वह उनके हाथ से नहीं छूटा। जब भगवान शिव बद्रीनाथ धाम पहुंचे तो वह कपाल इसी स्थान पर गिरा और उन्हें ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति मिली। इसी कारण इस स्थान का नाम ब्रह्मकपाल पड़ा।
राजपुरोहित ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने भी अपने पिता महाराज दशरथ सहित पितरों का श्राद्ध और पिंडदान ब्रह्मकपाल में किया था। तभी से यह स्थान पितृ तर्पण और पिंडदान के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां विधि-विधान से किए गए श्राद्ध एवं पिंडदान से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए ब्रह्मकपाल पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराते हैं। बद्रीनाथ धाम केवल चारधाम यात्रा का प्रमुख पड़ाव ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत केंद्र भी है।
राजपुरोहित ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे बद्रीनाथ धाम की यात्रा के दौरान धार्मिक परंपराओं का सम्मान करें, स्वच्छता बनाए रखें तथा देवभूमि की पवित्रता को अक्षुण्ण रखने में अपना सहयोग दें।
रिपोर्ट : पुष्कर सिंह राजपूत
बद्रीनाथ धाम, चमोली (उत्तराखंड)