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बड़ी खबर | जूता माला प्रकरण में बड़ा मोड़ मुख्य आरोपी शोबन सिंह तिवारी गिरफ्तार मजपीपल में उठे सवाल, गांव की प्रतिष्ठा और जनप्रतिनिधित्व पर चर्चा तेज
चम्पावत जनपद के लोहाघाट क्षेत्र का चर्चित जूता माला प्रकरण अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अंतिम व मुख्य आरोपी शोबन सिंह तिवारी पुत्र स्व. कुंवर सिंह निवासी मजपीपल को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार इस मामले में अब सभी पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
एसओजी टीम ने मुख्य आरोपी शोबन सिंह तिवारी को किया गिरफ्तार
चर्चित जूता माला प्रकरण में फरार चल रहे मुख्य आरोपी शोबन सिंह तिवारी पुत्र स्व. कुंवर सिंह निवासी मजपीपल को एसओजी टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से पुलिस की तलाश के बाद हुई इस गिरफ्तारी से मामले में बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
क्या था पूरा मामला
दिनांक 10 जून 2026 को वादी प्रेम राम पुत्र नैन राम निवासी डूंगरा बोरा, थाना लोहाघाट ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि टैक्सी किराये को लेकर विवाद के बाद मारपीट, गाली-गलौज, जाति सूचक शब्दों का प्रयोग, जूते की माला पहनाना, जान से मारने की धमकी देना और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
मामले में थाना लोहाघाट पुलिस ने मुकदमा संख्या 18/2026 दर्ज करते हुए
धारा 115(2), 126, 133, 308(2), 309(3), 351(3), 352, 356, 61(2) बीएनएस, एससी/एसटी एक्ट एवं 66(ई) आईटी एक्ट
के तहत कार्रवाई की।
पुलिस कार्रवाई में सभी आरोपी गिरफ्तार
पुलिस टीम ने पहले
हरीश सिंह बोहरा
वीरेंद्र सिंह बोहरा
मोहन चन्द
कमल राम
को गिरफ्तार किया। इसके बाद मुख्य आरोपी शोबन सिंह तिवारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
मजपीपल में लोगों की नाराजगी गांव की पहचान पर लगा सवाल
इस घटना के बाद ग्राम पंचायत मजपीपल में लोगों के बीच चर्चा और नाराजगी का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है
जिस व्यक्ति पर इस तरह के आरोप लगे, उसी के कहने पर हमने उसके छोटे भाई को अपना ग्राम प्रधान बनाया था। आज हमें यह कहते हुए दुख और शर्मिंदगी महसूस हो रही है कि हम मजपीपल ग्राम पंचायत के रहने वाले हैं। हमने जिस भरोसे के साथ अपना प्रतिनिधि चुना था, आज उसी भरोसे पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पूर्व ग्राम प्रधान परिवार की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों में चर्चा
ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले गांव में जिस परिवार ने लंबे समय तक ग्राम पंचायत का नेतृत्व किया, उसने अपनी अलग पहचान बनाई थी।
बताया जाता है कि पूर्व में उसी परिवार की महिला ग्राम प्रधान रही थीं और उसके बाद परिवार के सदस्य स्वयं ग्राम प्रधान रहे। लगभग 10 वर्षों तक गांव का प्रतिनिधित्व करने के दौरान गांव में कभी भी इस तरह की अपमानजनक या शर्मिंदगी वाली स्थिति सामने नहीं आई।
ग्रामीणों के अनुसार पूर्व ग्राम प्रधान और उनके परिवार ने छोटे-बड़े विवादों को हमेशा बातचीत और समझदारी से सुलझाने का प्रयास किया। लोग उन्हें सहनशील, शांत स्वभाव और गांव के हित में सोचने वाला नेतृत्व बताते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि केवल पद नहीं होता, बल्कि पूरे गांव की प्रतिष्ठा और सम्मान की जिम्मेदारी भी होती है।
कानून अपना काम कर रहा है
पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आगे की कार्रवाई न्यायालय के अधीन होगी।
जूता माला प्रकरण ने जहां कानून व्यवस्था पर चर्चा छेड़ दी है, वहीं मजपीपल में गांव की प्रतिष्ठा, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और सामाजिक सम्मान को लेकर भी बहस तेज हो गई है।