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दुष्कर्म नहीं, सुनियोजित षड्यंत्र एसपी रेखा यादव तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी जांच में नामजद आरोपी घटनास्थल पर नहीं मिले
चम्पावत के चर्चित नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण में पुलिस जांच के दौरान बड़ा मोड़ सामने आया है। पुलिस अधीक्षक रेखा यादव द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रारंभिक विवेचना और वैज्ञानिक जांच में मामला दुष्कर्म से अधिक सुनियोजित षड्यंत्र की ओर संकेत करता दिखाई दे रहा है।
पुलिस के अनुसार 06 मई को नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म की शिकायत मिलने पर तत्काल पोक्सो एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया और मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आरएफएसएल फील्ड यूनिट की मदद से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए, जबकि पीड़िता का मेडिकल परीक्षण, काउंसिलिंग और न्यायालय में बयान भी दर्ज कराए गए।
सीसीटीवी और सीडीआर से खुली नई परतें
विवेचना के दौरान सामने आया कि पीड़िता विवाह समारोह में अपनी इच्छा से एक दोस्त के साथ गई थी। पुलिस के अनुसार घटना दिवस पर पीड़िता की गतिविधियां और आवागमन सीसीटीवी फुटेज तथा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से सत्यापित किए गए हैं।
चिकित्सीय परीक्षण में किसी प्रकार की बाहरी या अंदरूनी चोट, संघर्ष अथवा जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत नहीं पाए गए। वहीं कुछ गवाहों के बयान तकनीकी साक्ष्यों से मेल नहीं खाते पाए गए।
कमल रावत का नाम जांच में चर्चा में
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कमल रावत, पीड़िता और उसकी महिला मित्र के बीच घटना वाले दिन असामान्य रूप से बार-बार संपर्क हुआ था। पुलिस के अनुसार यह तथ्य पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करता है।
पुलिस ने कहा कि तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह पुष्टि हुई है कि नामजद तीनों व्यक्ति घटना के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे।
बदले की भावना से रचा गया षड्यंत्र
पुलिस द्वारा जारी मीडिया नोट के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह आशंका सामने आई है कि बदले की भावना से प्रेरित होकर नाबालिग को बहला-फुसलाकर सुनियोजित तरीके से पूरा घटनाक्रम रचा गया। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच अभी जारी है।
एसपी रेखा यादव ने कहा कि
महिला एवं बाल अपराधों के प्रति चम्पावत पुलिस “Zero Tolerance” नीति पर कार्य करती है, लेकिन झूठी और भ्रामक शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जाएगा।
पुलिस ने आम जनता और मीडिया से अपील की
है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केवल सत्यापित तथ्यों का ही प्रसारण और प्रकाशन करें।