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आदर्श जिला चंपावत बना आंदोलन का गढ़, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का उबाल चरम पर
चंपावत। जिस चंपावत को आदर्श जिला के तौर पर पेश किया जाता है, वहीं अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के उग्र आंदोलन ने व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है। जिला मुख्यालय के भैरवा कार पार्किंग में चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल अब बड़े जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है, जिससे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
आंगनबाड़ी
कार्यकर्ता,सेविका,मिनी कर्मचारी संगठन के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर मोर्चा खोल रखा है। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन और तेज किया जाएगा।
सियासी समर्थन से बढ़ा आंदोलन का तापमान
मंगलवार को उत्तराखण्ड क्रांति दल (यूकेडी) ने भी आंदोलन को खुला समर्थन दे दिया। जिलाध्यक्ष दीपेश शर्मा के नेतृत्व में यूकेडी टीम धरना स्थल पहुंची और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस समर्थन के बाद आंदोलन ने और आक्रामक रुख अपना लिया है।
ये हैं प्रमुख मांगें
मानदेय में ₹140 प्रतिदिन राज्य स्तर से बढ़ोतरी
केंद्र को ₹150 प्रतिदिन वृद्धि का प्रस्ताव भेजने की मांग
सेवानिवृत्ति पर ₹10 लाख देने का शासनादेश लागू किया जाए
तब तक ₹300 की कटौती पर रोक लगाई जाए
बायोमेट्रिक प्रणाली से न जोड़ा जाए
आदर्श जनपद पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के आदर्श जिला दावे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा
अगर यही आदर्श है, तो फिर हमें सड़कों पर उतरने की नौबत क्यों आई?
आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
कार्यकर्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह से झकझोर दिया जाएगा।
धरना स्थल पर यूकेडी पदाधिकारी विपिन शर्मा, पीयूष तिवारी, संजय भट्ट, गजेंद्र सिंह बोहरा, सीएम जोशी, गिरीश भट्ट सहित कई लोग मौजूद रहे।
आदर्श जिला का तमगा लिए चंपावत अब असंतोष की आग में तप रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का यह आंदोलन सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है अब देखना होगा कि समाधान निकलता है या संघर्ष और तेज होता है।
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