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80 साल बाद भी नहीं मिली आज़ादी! तराई-भाबर के 100+ बन गांव आज भी हक से वंचित गोठ, खत्ता और टोंगिया गांवों का दर्द छलका
देहरादून के विकासनगर से लेकर हरिद्वार, उधम सिंह नगर और चंपावत के टनकपुर तक फैले बन गांवों के लोग आज भी मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अंग्रेजी शासन काल से बसे इन गांवों को अब तक भूमि का मालिकाना हक नहीं मिला।
सबका विकास पार्टी का बड़ा आरोप
डॉ. हरिश्चंद्र शर्मा उर्फ नरेंद्र ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा
> इन गांवों के लोग आज भी गुलामी जैसा जीवन जी रहे हैं, सरकारों ने इन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया है।
जमीनी हकीकत
पक्के स्कूल नहीं
अस्पताल नहीं
सिंचाई व्यवस्था नहीं
पक्के मकान की अनुमति नहीं
पंचायत व्यवस्था लागू नहीं
नागरिकता और परिवार रजिस्टर का अभाव
बच्चों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र नहीं
किसानों को KCC और बैंक ऋण नहीं
राजनीति पर वार
बीजेपी-कांग्रेस ने सिर्फ वोट लिए, समस्याएं नहीं सुलझाईं
बड़ी घोषणा
सत्ता में आए तो सभी बन गांवों को राजस्व गांव घोषित करेंगे
जनता से आह्वान
अब जागो एक और आज़ादी की लड़ाई के लिए तैयार हो जाओ