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क्वेराला घाटी से सबका विकास पार्टी का बड़ा ऐलान विकास बिजली रोजगार और पहाड़ बचाओ अभियान पर फोकस 78 साल आज़ादी के बाद भी 74 तोक अंधेरे में सरकारों पर तीखा हमला
उत्तराखंड क्वेराला घाटी, चम्पावत की सियासत में नई हलचल देखने को मिली जब क्वेराला घाटी में आयोजित जनसभा में सबका विकास पार्टी ने राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। पार्टी नेताओं ने बिजली, रोजगार, किसानों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकारों पर सीधा हमला बोला।
मुख्य खबर
जनसभा में नेताओं ने कहा कि
देश को आज़ाद हुए करीब 78 साल हो चुके हैं
लेकिन आज भी चम्पावत के 74 तोक बिजली, पानी और सड़क से वंचित हैं
इसे उन्होंने व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया
मुख्य फोकस और घोषणाएं
किसानों के लिए कृषि ऋण राहत (₹2 लाख तक KCC माफी)
आम जनता को बिजली-पानी में राहत
पहाड़ों में स्थानीय बिजली उत्पादन
उद्योगों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता
बेरोजगारों के लिए सहायता योजनाएं
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं
पहाड़ बचाओ अभियान का ऐलान
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश शर्मा उर्फ नरेंद्र उत्तराखंडी ने
पहाड़ बचाओ अभियान के तहत
₹2 लाख तक KCC कृषि ऋण माफी
पर्वतीय क्षेत्रों में नए जिलों के गठन
राज्यभर में जन आंदोलन की शुरुआत
का ऐलान किया।
नए जिलों का प्रस्ताव
रामगंगा (भिकियासैंण)
रानीखेत
गैरसैंण
डीडीहाट
गंगावली
लैंसडाउन
पुरोला
खटीमा
रामनगर
हल्द्वानी
कोटद्वार
रुड़की
काशीपुर
पार्टी का दावा
प्रशासन को मजबूत करने के लिए नए जिले जरूरी
रोजगार पर बड़ा सवाल
जब उत्तराखंड में इंडस्ट्रीज एरिया हैं, तो स्थानीय युवाओं को पहले रोजगार क्यों नहीं?
पार्टी का ऐलान:
हमारी सरकार बनने पर पहले उत्तराखंड के युवाओं को ही रोजगार मिलेगा
बीजेपी और कांग्रेस पर सीधा हमला
सभा में आरोप लगाया गया कि
दोनों पार्टियों ने मुख्यमंत्री बदलने का काम किया
लेकिन जमीनी विकास पीछे रह गया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (क्रम अनुसार)
नित्यानंद स्वामी
भगत सिंह कोश्यारी
नारायण दत्त तिवारी
भुवन चंद्र खंडूरी
रमेश पोखरियाल निशंक
भुवन चंद्र खंडूरी (दूसरी बार)
विजय बहुगुणा
हरीश रावत
त्रिवेंद्र सिंह रावत
तीरथ सिंह रावत
पुष्कर सिंह धामी
जन आंदोलन की शुरुआत
पार्टी ने उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में जनसभाओं के माध्यम से जन आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया
साथ ही 2027 विधानसभा चुनाव के लिए
प्रत्याशियों को पार्टी से जुड़ने का आह्वान किया गया
निष्कर्ष
विकास रोजगार और पहाड़ के मुद्दों पर जोर
जन आंदोलन के जरिए सियासी जमीन मजबूत करने की कोशिश
अब देखना होगा
क्या पहाड़ बचाओ अभियान उत्तराखंड की राजनीति में नया मोड़ लाएगा?