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चम्पावत में ₹55.52 करोड़ का साइंस सेंटर: जमीन पर हकीकत या सिर्फ दिखावा?
चम्पावत, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत में निर्माणाधीन ₹55.52 करोड़ की लागत वाले अत्याधुनिक साइंस सेंटर का निरीक्षण किया। सरकार इसे विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का बड़ा केंद्र बता रही है, लेकिन अब इस पर सियासत भी तेज हो गई है।
सरकार का दावा
“भविष्य का साइंस हब”
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयसीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
परियोजना में
फन साइंस गैलरी, विज्ञान एवं कृषि गैलरी
120 सीटों का ऑडिटोरियम
71 सीटों वाला आधुनिक प्लैनेटेरियम
छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर और प्रशिक्षण हॉल
जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री का कहना है कि यह केंद्र प्रदेश के बच्चों के लिए विज्ञान और नवाचार का बड़ा प्लेटफॉर्म बनेगा।
जमीनी सवाल: क्या वाकई बदलेगी तस्वीर?
जहां एक ओर सरकार इस प्रोजेक्ट को ऐतिहासिक बता रही है, वहीं स्थानीय स्तर पर सवाल भी उठने लगे हैं
क्या यह प्रोजेक्ट तय समय पर पूरा होगा?
क्या दूरस्थ गांवों के बच्चों को इसका वास्तविक लाभ मिलेगा?
क्या यह सिर्फ “दिखावे का मॉडल” बनकर रह जाएगा?
निरीक्षण के बीच उठे विकास पर सवाल
चम्पावत में लंबे समय से सड़क, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में विपक्ष और स्थानीय लोग पूछ रहे हैं
“क्या साइंस सेंटर से पहले बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होना चाहिए था?”
बच्चों से संवाद, लेकिन रोजगार पर सन्नाटा?
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान बच्चों के विज्ञान मॉडलों का अवलोकन किया और उनका उत्साहवर्धन भी किया।
लेकिन बड़ा सवाल यही
“पढ़ाई के बाद इन युवाओं को रोजगार कहां मिलेगा?”
राजनीति गरम, प्रोजेक्ट बना मुद्दा
यह साइंस सेंटर अब सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि चम्पावत की राजनीति का नया केंद्र बनता जा रहा है।
सरकार इसे “भविष्य का निवेश” बता रही है, जबकि विरोधी इसे “जमीनी हकीकत से दूर योजना” कह रहे हैं।
जनता के मन में सवाल
क्या यह साइंस सेंटर चम्पावत की तस्वीर बदलेगा?
या फिर यह भी एक बड़ा वादा बनकर रह जाएगा?