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चम्पावत से दो तस्वीरें एक तरफ आस्था का पावर दूसरी तरफ विकास पर सवाल
चम्पावत। देवभूमि चम्पावत से एक ही दिन में दो बिल्कुल अलग तस्वीरें सामने आई हैं
एक तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व को देव आशीर्वाद बताया जा रहा है
तो दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों से उठ रही है विकास की हकीकत पर तीखी नाराजगी
[/h2]आस्था का शक्ति केंद्र: देवताओं ने चुना नेतृत्व[/h2]
चम्पावत के धार्मिक स्थलों
मां पूर्णागिरि मंदिर
बालेश्वर महादेव मंदिर
गोलू देवता मंदिर
गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब
जैसे आस्था केंद्रों से जुड़ी मान्यताओं के बीच लोगों का कहना है
धामी सिर्फ नेता नहीं, देवभूमि की आस्था से जुड़े प्रतिनिधि हैं
बताया जा रहा है कि धार्मिक पर्यटन, मानसखंड योजना और धामों के विकास ने क्षेत्र को नई पहचान दी है।
दूसरी तस्वीर: घोषणाएं कागजों में, जनता सड़कों पर
वहीं लोहाघाट क्षेत्र से उठी आवाज सरकार और प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रही है
घिंघारुकोट–बांस बंसवाड़ी सड़क
2-3 साल बाद भी अधूरी
फाइलों और वन आपत्तियों में फंसी
ग्रामीणों का गुस्सा साफ
घोषणाएं सिर्फ झुनझुना बनकर रह गई हैं
चार पीढ़ियां सड़क का इंतजार कर रही हैं
बुजुर्ग की दर्द भरी पुकार
एक बुजुर्ग रतन सिंह की आंखों में आंसू और जुबां पर दर्द
जिंदगी भर सड़क मांगते रहे अब कम से कम अंत्येष्टि के लिए ही सड़क दे दो!
युवाओं का गुस्सा अब सड़क पर उतरने की तैयारी
40 हजार से ज्यादा लोगों का जीवन प्रभावित
रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सब पर असर
युवा बोले अब आंदोलन ही आखिरी रास्ता
सबसे बड़ा सवाल
क्या विकास सिर्फ जिला मुख्यालय तक सीमित है?
क्या गांवों की आवाज सरकार तक नहीं पहुंच रही?
क्या आस्था और विकास के बीच संतुलन बिगड़ रहा है?
चम्पावत का संदेश
एक तरफ देव आशीर्वाद की राजनीति
दूसरी तरफ जमीन पर विकास की हकीकत
अब देखना होगा
सरकार आस्था की इस ताकत को विकास की सच्चाई में बदल पाती है या नहीं