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राज्य बना पर हालात नहीं बदले लधिया घाटी से उठी बगावत की सबसे बड़ी हुंकार
लोहाघाट। लधिया घाटी से ग्राउंड ज़ीरो रिपोर्ट
आज लधिया घाटी में जो हुआ, उसने साफ कर दिया अब पहाड़ चुप नहीं रहेगा
(यूकेडी) की महाजन सभा ने ऐसा रूप लिया कि यह सीधे-सीधे जनक्रांति का बिगुल बन गई।
वादियों में गूंजा गुस्सा, हर दिल में उबाल
हजारों लोगों की मौजूदगी में पूरा इलाका नारों से थर्रा उठा
जल हमारा, जंगल हमारा, पहाड़ हमारा
जाग पहाड़ी जाग
कुमाऊं का कुमाऊंनी जाग, गढ़वाल का गढ़वाली जाग
भूमि का भूमिया जाग
ये सिर्फ नारे नहीं थे ये वर्षों की उपेक्षा का विस्फोट थे
सबसे बड़ा खुलासा राज्य बना, पर हालात वही
सभा में उत्तराखंड क्रांति दल के नेताओं ने बड़ा और सीधा आरोप लगाया
उत्तराखंड बनने से पहले जो हालत थे, वही हालत आज भी हैं
जब यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश में था, तब भी पहाड़ पिछड़ा था और आज अलग राज्य बनने के बाद भी तस्वीर नहीं बदली
दूर-दराज़ और दुर्गम इलाकों में आज भी सड़क, अस्पताल, स्कूल और रोजगार का अभाव है
सीधा सवाल—फिर राज्य बना किसके लिए
नेताओं ने कहा
अगर पहाड़ को उसका हक नहीं मिला, तो अलग राज्य बनने का सपना अधूरा ही है
विकास सिर्फ कागजों में है, जमीन पर नहीं
महिलाएं, युवा, बुजुर्ग—सब सड़कों पर
इस सभा की सबसे बड़ी ताकत रही जनता
महिलाएं आगे
युवा जोश में
बुजुर्ग अनुभव के साथ
यानी यह आंदोलन अब हर घर की आवाज बन चुका है।
जनता का ऐलान अबकी बार आर-पार
सभा में एक स्वर में गूंजा
अबकी बार पहाड़ का अधिकार
इस बार उत्तराखंड में यूकेडी की सरकार बनाकर रहेंगे
इन दिग्गजों की मौजूदगी ने बढ़ाया दम
सभा में प्रहलाद सिंह मेहरा, राजेंद्र पुनेठा (राजू भैया), हेमंत सिंह, प्रकाश सिंह, लक्ष्मण सिंह भंडारी, विशाल सिंह बोहरा, जगत सिंह, नवीन सिंह, कुमाऊं दत्त, राजेंद्र सिंह बोहरा, त्रिलोक सिंह बोहरा, भुवन चंद्र जोशी, गणेश सिंह, अमित कुमार, दीपक सिंह, रमेश सिंह, धीरज सिंह, विकास सिंह, कमल सिंह, सुरेश सिंह सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
राजनीति में बड़ा बदलाव तय
लधिया घाटी से उठी यह लहर अब पूरे उत्तराखंड में फैलने के संकेत दे रही है।
यह सिर्फ सभा नहीं
यह सिर्फ राजनीति नहीं
यह पहाड़ की अस्मिता की आखिरी लड़ाई का आगाज़ है।
बना पर पहाड़ अब भी प्यासा लधिया घाटी से फूटा जनआक्रोश
स
अब नहीं सहेंगे—हक लेकर रहेंगे
पहाड़ जाग चुका है, अब बदलाव तय है