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पॉक्सो प्रकरण में बड़ा न्यायिक फैसला माननीय उच्च न्यायालय ने पूरी कार्यवाही की समाप्त
नैनीताल / चंपावत
जनपद चंपावत से जुड़े एक संवेदनशील प्रकरण में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए पूरे आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही को समाप्त कर दिया है। यह मामला विशेष सत्र वाद संख्या 60/2024 के रूप में माननीय विशेष सत्र न्यायालय चंपावत में विचाराधीन था।
माननीय न्यायमूर्ति आलोक महरा की पीठ के समक्ष दायर आवेदन सी-528 में यह प्रार्थना की गई थी कि पक्षकारों के बीच हुए आपसी समझौते के आधार पर आरोप पत्र तथा संपूर्ण कार्यवाही को निरस्त किया जाए।
न्यायालय में पेश हुए दोनों पक्ष
न्यायालय के समक्ष दोनों पक्ष अपने अधिवक्ताओं के साथ उपस्थित हुए और यह निवेदन किया कि उनके बीच उत्पन्न विवाद अब समाप्त हो चुका है।
अभिलेखों के अनुसार संबंधित पक्ष ने यह भी कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट आपसी गलतफहमी और कहासुनी की स्थिति में दर्ज हो गई थी।
राज्य पक्ष ने किया विरोध
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने समझौता आवेदन का विरोध किया, लेकिन माननीय न्यायालय ने गवाहों के बयानों और उपलब्ध अभिलेखों का सावधानीपूर्वक परीक्षण करने के बाद अपना निर्णय सुनाया।
साक्ष्यों में आरोप स्थापित नहीं
माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि
भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 75(1)(i) को पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 9(फ) और 10 के साथ पढ़ने पर इस मामले में अपराध के आवश्यक तत्व अभिलेखों में उपलब्ध साक्ष्यों से स्थापित नहीं हो पा रहे हैं।
इस आधार पर न्यायालय ने माना कि दोष सिद्ध होने की संभावना अत्यंत कमजोर है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का भी उल्लेख
माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में भारत का सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन मामलों में पक्षकारों के बीच समझौता हो चुका हो और दोष सिद्ध होने की संभावना अत्यंत कम हो, ऐसे मामलों में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायसंगत नहीं माना जाता।
पूरे मुकदमे पर लगा विराम
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए माननीय न्यायालय ने आदेश पारित किया कि
विशेष सत्र वाद संख्या 60/2024 की संपूर्ण कार्यवाही समाप्त की जाती है तथा संबंधित सी-528 आवेदन का निस्तारण कर दिया जाता है।
निष्कर्ष
माननीय उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद चंपावत से जुड़े इस प्रकरण में कानूनी रूप से पूरा मुकदमा समाप्त हो गया है, जिसे जिले के विधिक हलकों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।
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