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महिला आयोग आपके द्वार अभियान से चंपावत में न्याय की दस्तक 18 मामलों की सुनवाई, 14 का मौके पर समाधान
जनपद चंपावत में आज उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल के नेतृत्व में आयोजित “महिला आयोग आपके द्वार” जनसुनवाई कार्यक्रम में पीड़ित महिलाओं की आवाज को सीधे मंच मिला। कार्यक्रम के दौरान कुल 18 मामलों की सुनवाई हुई, जिनमें से 14 मामलों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया, जबकि 4 जटिल मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए आयोग मुख्यालय भेजा गया।
जनसुनवाई के दौरान अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यह अभियान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीड़ित महिलाओं को उनके घर-द्वार पर न्याय दिलाने का सशक्त प्रयास है। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं दूरी, आर्थिक स्थिति या सामाजिक दबाव के कारण आयोग के मुख्यालय तक नहीं पहुंच पातीं, इसलिए आयोग स्वयं गांव-गांव और जनपदों तक पहुंचकर उनकी समस्याएं सुन रहा है।
तलाक समाधान नहीं, परिवार को जोड़ना जरूरी कुसुम कंडवाल
पारिवारिक विवादों की सुनवाई करते हुए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि
तलाक पारिवारिक समस्याओं का समाधान नहीं है। पति-पत्नी को प्रयास कर परिवार को बचाना चाहिए और मिलकर बच्चों को अच्छे संस्कार देने चाहिए।
पुलिस और प्रशासन को सख्त निर्देश
अध्यक्ष ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर सरकारी और निजी संस्थान में ICC (Internal Complaints Committee) का गठन अनिवार्य किया जाए ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ किसी भी तरह के उत्पीड़न पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
उन्होंने पुलिस प्रशासन को भी निर्देशित किया कि थानों में महिलाओं के साथ मधुर, संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए तथा उनकी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई हो।
हत्या और छेड़छाड़ के मामलों पर सख्ती
जनसुनवाई में एक महिला ने होली के दौरान अपने भाई की हत्या के मामले में जांच पर असंतोष जताया। इस पर अध्यक्ष ने एसपी चंपावत को तत्काल जांच अधिकारी बदलने और निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए।
वहीं एक युवती ने अपने ही भाइयों पर मारपीट और नशे की हालत में छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगाया। इस पर अध्यक्ष ने पुलिस अधिकारियों को कठोर कानूनी कार्रवाई करने और पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए।
जनसुनवाई में आए प्रमुख मामले
एक महिला ने पति द्वारा मारपीट की शिकायत की — CO टनकपुर को कार्रवाई के निर्देश
एक महिला ने बताया कि उसका पति 4 साल पहले पंजाब गया था और अब संपर्क नहीं कर रहा — पुलिस को तलब करने के निर्देश
एक पिता ने शिकायत की कि उसकी पत्नी ढाई साल की बेटी से मिलने नहीं दे रही — बाल कल्याण समिति (CWC) को हस्तक्षेप के निर्देश
पेयजल समस्या पर भी लिया संज्ञान
अमोली ग्राम की प्रधान द्वारा पेयजल संकट की समस्या उठाए जाने पर अध्यक्ष ने जिलाधिकारी चंपावत को तुरंत समाधान कराने के निर्देश दिए, ताकि महिलाओं को पानी की समस्या से राहत मिल सके।
महिलाओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी
अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं की सहायता के लिए सरकार ने कई व्यवस्थाएं की हैं जैसे:
181 महिला हेल्पलाइन
वन स्टॉप सेंटर (OSC)
जिला प्रोबेशन अधिकारी (DPO)
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से निशुल्क कानूनी सहायता
उन्होंने महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि
अगर कोई महिला कहीं भी असुरक्षित महसूस करती है तो वह बिना डर के आयोग या प्रशासन से संपर्क करे।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में आयोग सदस्य किरण देवी, मुख्य विकास अधिकारी डॉ जीएस खाती, अपर जिलाधिकारी के एन गोस्वामी, एडिशनल सीएमओ डॉ बलबीर सिंह, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा सहित कई जनपद स्तरीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
निष्कर्ष
चंपावत में आयोजित इस जनसुनवाई ने यह साबित कर दिया कि महिला आयोग अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं, बल्कि गांव-गांव पहुंचकर महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए सक्रिय है। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को सुनिश्चित करना अब शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनता जा रहा है।