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फायर विभाग की लापरवाही पर कार्रवाई शुरू, एक निलंबित कमल रावत बोले: जो भी दोषी हो, सभी सस्पेंड किए जाएं
चम्पावत।
ग्राम सभा कुलेठी में शॉर्ट सर्किट से श्री बसंत बल्लभ के आवास में लगी आग के मामले में फायर विभाग की लापरवाही अब खुलकर सामने आने लगी है। पुलिस अधीक्षक चम्पावत द्वारा फायर सर्विस चालक चरन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अग्निशमन कार्य में ड्यूटी स्तर पर गंभीर चूक हुई थी।
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष एवं पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष कमल रावत ने कहा कि
एक कर्मचारी का निलंबन यह साबित करता है कि फायर विभाग की लापरवाही से एक परिवार का घर राख हुआ, लेकिन यह मानना गलत होगा कि इस पूरे मामले में सिर्फ एक ही व्यक्ति दोषी है।
कमल रावत ने साफ शब्दों में कहा
जो भी फायर विभाग के अधिकारी और कर्मचारी इस घटना के समय ड्यूटी पर थे, जिनकी जिम्मेदारी आग पर समय रहते काबू पाने की थी, अगर जांच में वे दोषी पाए जाते हैं तो सभी को बिना किसी भेदभाव के सस्पेंड किया जाए।
उन्होंने फायर विभाग की कार्यप्रणाली पर और गंभीर सवाल उठाते हुए कहा
क्या फायर स्टेशन में और किसी को गाड़ी चलानी नहीं आती थी? अगर चालक मौजूद नहीं था तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? लोहाघाट से फायर ब्रिगेड की गाड़ी आने का इंतजार क्यों किया गया, जबकि आग चम्पावत में लगी थी
कमल रावत ने यह भी कहा कि
इस पूरे प्रकरण में कुछ ऐसी बातें हैं, जो सामने नहीं आ रही हैं। ऐसा लग रहा है कि कुछ तथ्यों को छुपाने की कोशिश की जा रही है, ताकि जिम्मेदारी सीमित लोगों तक ही रहे।
उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट और फायर स्टेशन के पास आग लगने के बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई न होना, यह दर्शाता है कि
यह केवल एक व्यक्ति की चूक नहीं, बल्कि पूरे फायर ब्रिगेड सिस्टम की विफलता है
कमल रावत ने स्पष्ट किया कि यह मामला
न तो जिलाधिकारी की कार्यशैली पर सवाल है और न ही मुख्यमंत्री की नीयत पर, बल्कि यह फायर विभाग की जवाबदेही और अनुशासन का सीधा मामला है।
उन्होंने मांग की कि
घटना के समय का पूरा ड्यूटी चार्ट सार्वजनिक किया जाए,
फायर वाहनों की तैनाती और मूवमेंट लॉग की जांच हो,
और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच रिपोर्ट जनता के सामने रखी जाए।
कमल रावत ने चेतावनी देते हुए कहा
अगर जांच को दबाने या सीमित करने की कोशिश हुई, तो यह मामला और बड़ा जनआंदोलन बनेगा। जनता अब आधी-अधूरी कार्रवाई नहीं, पूरी सच्चाई और पूरी कार्रवाई चाहती है।
यह मामला अब केवल एक अग्निकांड नहीं रहा, बल्कि फायर विभाग की कार्यसंस्कृति, जवाबदेही और पारदर्शिता की कड़ी परीक्षा बन चुका है।