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सत्ता बेखबर रही, जनसैलाब ने सड़कों पर लिख दी इबारत
ऋषिकेश में घर–जमीन बचाने को उमड़े हजारों लोग, वन भूमि प्रभावित परिवारों की ऐतिहासिक महारैली
लाल सिंह बोहरा के नेतृत्व में रुसा फार्म, गुमानीवाला से हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर आए
उपजिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा गया चेतावनी भरा ज्ञापन
ऋषिकेश।
सरकार की चुप्पी, प्रशासन की उदासीनता और वर्षों से लंबित न्याय के खिलाफ सोमवार को ऋषिकेश की सड़कों पर जनाक्रोश फूट पड़ा। वन भूमि में बसे हजारों प्रभावित परिवार अपने घर, जमीन और अस्तित्व की लड़ाई को लेकर सड़कों पर उतर आए। पूरा शहर इस ऐतिहासिक जनआंदोलन का गवाह बना।
इस महारैली में लाल सिंह बोहरा के नेतृत्व में रुसा फार्म, गुमानीवाला क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे, जिससे आंदोलन को और अधिक बल मिला और जनसैलाब का दायरा व्यापक होता चला गया।
सोमवार सुबह आईडीपीएल हॉकी मैदान में सुबह 10 बजे तक ही 10 हजार से अधिक लोग एकत्र हो चुके थे। 15–20 मिनट के अंतराल में लगातार अलग-अलग क्षेत्रों से रैलियां पहुंचती रहीं। हालात ऐसे बने कि हॉकी मैदान छोटा पड़ गया और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लोगों को सड़क तक खड़ा करना पड़ा।
करीब 11 बजे महारैली ने शहर की सड़कों पर कदम रखा। हरिद्वार रोड, घाट चौक, रेलवे रोड, गोरा देवी चौक होते हुए जब यह जनसैलाब ऋषिकेश तहसील की ओर बढ़ा तो दो से ढाई किलोमीटर तक सड़कों पर सिर्फ इंसान ही इंसान नजर आए। नारों में एक ही आवाज गूंज रही थी
अब घर नहीं छोड़ेंगे, अब और देरी नहीं सहेंगे।
प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि दशकों से जिस भूमि पर वे रह रहे हैं, आज उसी भूमि से उन्हें बेदखल करने की तैयारी की जा रही है। न तो आज तक स्वामित्व अधिकार दिए गए और न ही कोई स्थायी समाधान निकाला गया। यही कारण है कि उन्हें अपने घर और भविष्य की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा।
महारैली के दौरान आयोजित जनसभा में बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में उपजिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहरा के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन प्रेषित किया गया। ज्ञापन में मांग की गई कि वन भूमि में रह रहे प्रभावित परिवारों को भूमि पर स्वामित्व अधिकार दिया जाए और किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए।
इस मौके पर महापौर शंभू पासवान, पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सिंह सजवान, पूर्व महापौर अनीता ममगाईं, कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोहित उनियाल, महानगर अध्यक्ष राकेश सिंह, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी भगत सिंह कोठारी, भाजपा जिला महामंत्री प्रतीक कालिया, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष नरेंद्र राणा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
वक्ताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य में तथाकथित ट्रिपल इंजन सरकार होने के बावजूद हजारों परिवार आज अपने घर बचाने के लिए सड़क पर संघर्ष कर रहे हैं। यह सरकार की संवेदनहीनता और नीतिगत विफलता को उजागर करता है।
आंदोलन में शामिल लोगों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो यह संघर्ष ऋषिकेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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