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देवलहाट (बैतडी) नेपाल–भारत सीमा क्षेत्र में आस्था, संस्कृति और प्रकृति का साझा धार्मिक केंद्र देवल हाट, बैतडी: नेपाल–भारत सीमाक्षेत्रको साझा धार्मिक, सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक केन्द्र बैतडी (नेपाल) पिथौरागढ़ (भारत)
नेपाल के बैतडी जिले का देवलहाट क्षेत्र नेपाल–भारत सीमा से सटे होने के कारण दोनों देशों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का साझा केंद्र माना जाता है। यहां स्थित पंचदेवल शिव धाम, सप्तदेवल और कालभैरव मंदिर में नेपाल के साथ-साथ भारत के सीमावर्ती जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
पंचदेवल शिव धाम और सप्तदेवल में महाशिवरात्रि सहित प्रमुख धार्मिक पर्वों पर विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और जागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन अवसरों पर श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक, सहस्रलिंग दर्शन, शिवकुंड स्नान तथा कालभैरव दर्शन करते हैं।
कालभैरव मंदिर को क्षेत्र में सुरक्षा और आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण शक्तिपीठ माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाला स्थल माना जाता है, जिसके चलते नेपाल और भारत दोनों ओर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
देवलहाट क्षेत्र में स्थित पीपल चौतारी और प्राचीन शिलालेख स्थल इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को दर्शाते हैं। ये स्थल सीमावर्ती समाज में आपसी संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक मेल-मिलाप के केंद्र के रूप में भी पहचाने जाते हैं।
धार्मिक आयोजनों के दौरान बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या से सीमा क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। दोनों देशों से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन और समुदाय स्तर पर समन्वय देखा जा रहा है।
बैतडी (नेपाल) पिथौरागढ (भारत), २९ जनवरी | एजेन्सी
नेपालको बैतडी जिल्लास्थित देवलहाट क्षेत्र नेपाल–भारत सीमाक्षेत्रमा रहेको साझा धार्मिक आस्थाको केन्द्रका रूपमा परिचित छ। यहाँ अवस्थित पञ्चदेवल शिवधाम, सप्तदेवल र कालभैरव मन्दिर मा नेपालसँगै भारतका सीमावर्ती जिल्लाबाट पनि उल्लेख्य संख्यामा श्रद्धालुहरू दर्शनका लागि पुग्ने गरेका छन्।
पञ्चदेवल शिवधाम र सप्तदेवल मा महाशिवरात्रि लगायत प्रमुख धार्मिक पर्वहरूमा विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन तथा जागरण कार्यक्रमहरू आयोजना गरिन्छ। यस अवसरमा भक्तजनहरूले शिवलिङ्गमा जलाभिषेक, सहस्रलिङ्ग दर्शन, शिवकुण्ड स्नान तथा कालभैरव दर्शन गर्ने गर्दछन्।
कालभैरव मन्दिर लाई सुरक्षा र धार्मिक आस्थासँग जोडिएको महत्वपूर्ण शक्तिपीठका रूपमा लिइन्छ। स्थानीय विश्वास अनुसार यस मन्दिरले नकारात्मक शक्तिबाट रक्षा गर्ने मान्यता रहेको छ, जसका कारण नेपाल र भारत दुवै तर्फका श्रद्धालुहरू यहाँ आउने गर्छन्।
देवलहाट क्षेत्रमा रहेका पीपल चौतारी तथा प्राचीन शिलालेख स्थलहरू ले यस क्षेत्रको ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक पहिचानलाई उजागर गर्छन्। यी स्थलहरू सीमाक्षेत्रका समुदायबीच आपसी संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा सामाजिक मेलमिलापका केन्द्रका रूपमा समेत रहेका छन्।
धार्मिक अवसरहरूमा बढ्दो श्रद्धालुहरूको उपस्थितिले सीमाक्षेत्रमा धार्मिक पर्यटन प्रवर्द्धन भएको देखिन्छ। भक्तजनहरूको सहजता र सुरक्षाका लागि स्थानीय प्रशासन तथा समुदायस्तरमा आवश्यक समन्वय भइरहेको जनाइएको छ।