🔊
PMGSY से लेकर पुल तक हर योजना सवालों के घेरे में सीमा क्षेत्र में विकास नहीं, जांच से भागता सिस्टम सड़क ने तोड़ी सिंचाई गुल, 15 लाख की फेंसिंग गायब, पुल जनता के काम का नहीं वर्तमान जिलाधिकारी से जगी उम्मीद की किरण
लोहाघाट (चम्पावत) | ग्राम पंचायत पासम ब्लोटा, पोस्ट ऑफिस रोशाल, विकास खंड लोहाघाट।
भारत–नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटी ग्राम पंचायत पासम ब्लोटा में बीते पाँच वर्षों के दौरान कराई गई विकास योजनाएं अब जांच, जनआक्रोश और सवालों के कठघरे में खड़ी हैं। PMGSY सड़क निर्माण, सिंचाई गुल क्षति, 15 लाख की फेंसिंग योजना और पुल निर्माण—हर स्तर पर अनियमितताओं के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
सड़क बनी, खेती उजड़ी
वर्ष 2020–21 में बने पासम–ब्लोटा मोटर मार्ग ने जहां कनेक्टिविटी दी, वहीं सड़क निर्माण के दौरान पासम ब्लोटा और धनाल तोक के किसानों की वर्षों पुरानी सिंचाई गुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
सैकड़ों नाली भूमि आज भी सिंचाई से वंचित है, लेकिन उस समय न तो कोई आपत्ति दर्ज कराई गई और न ही पुनर्निर्माण की मांग उठी।
ग्रामीणों का आरोप है कि उस वक्त ग्राम पंचायत की प्रधान वर्तमान प्रधान चंद्रकांत तिवारी की पत्नी थीं और उसी परियोजना से जुड़े निजी ठेके चल रहे थे, जिससे जनहित को नजरअंदाज किया गया।
15 लाख की फेंसिंग—कागजों में पूरी, जमीन पर गायब
वर्ष 2022–23 में बाबा नागार्जुन धाम, नखरुघाट में सुरक्षा के लिए 15 लाख रुपये की तारबाड़ स्वीकृत की गई, लेकिन वर्ष 2025 तक—
न फेंसिंग नजर आती है
न गुणवत्ता का प्रमाण
न कोई भौतिक सत्यापन रिपोर्ट
ग्रामीणों का सवाल है
अगर पैसा खर्च हुआ है, तो काम कहां है
पुल बना, लेकिन जनता से दूर
वर्ष 2023–24 में अति वृष्टि से बहा पुल दो जिला पंचायतों रायकोट कुंवर और मटियानी को जोड़ता था। स्थायी पुल के लिए धन स्वीकृत हुआ, लेकिन आरोप है कि पुल ऐसी जगह बना दिया गया जहां से जनता को कोई लाभ नहीं।
नखरुघाट मेला समिति के विरोध के बावजूद कथित तौर पर निर्णय बदलने की कोशिश नहीं की गई।
अब हुआ सर्वे, जांच के दायरे में योजनाएं
मामला सामने आने के बाद प्रशासन द्वारा स्थलीय सर्वे किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार
सर्वे रिपोर्ट को जांच में रखा गया है
भविष्य के किसी भी कार्य को लेकर ग्राम प्रधान से सतर्क रहकर कार्य करने के निर्देशों की चर्चा है
हालांकि जनता का कहना है कि केवल सर्वे नहीं, जवाबदेही तय होना जरूरी है।
सवाल पूछो तो प्रधान अब भी मौन
उत्तर ध्वनि न्यूज़ द्वारा ग्राम प्रधान चंद्रकांत तिवारी से संपर्क के तमाम प्रयास किए गए, लेकिन
मोबाइल लगातार स्विच ऑफ
व्हाट्सएप संदेशों का कोई जवाब नहीं
विकासखंड लोहाघाट के अधिकारियों के माध्यम से सूचना पहुंचाने के बावजूद भी प्रधान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
वर्तमान जिलाधिकारी से जगी उम्मीद की किरण
लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और जनआक्रोश के बीच सीमावर्ती गांवों की जनता को अब वर्तमान जिलाधिकारी से उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्तमान जिलाधिकारी निष्पक्षता और सख्ती से
सभी योजनाओं की स्थलीय व वित्तीय जांच
दोषियों पर कार्रवाई
और जनहित के कार्यों को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाने की पहल करती हैं
तो वर्षों से दबे मामलों पर न्याय मिल सकता है।
जनता की अंतिम मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से स्पष्ट मांग रखी है
PMGSY से क्षतिग्रस्त सिंचाई गुल का पुनर्निर्माण
गुल निर्माण की लागत PMGSY से वसूली
किसानों को पूरा मुआवजा
15 लाख की फेंसिंग योजना की उच्चस्तरीय जांच
पुल निर्माण की तकनीकी जांच
ग्राम प्रधान के पिछले 5 वर्षों के कार्यों का ऑडिट
जांच पूरी होने तक नई योजनाओं पर रोक
ग्रामीणों का कहना है
अब भरोसा वर्तमान जिलाधिकारी पर है, उम्मीद है कि सीमा क्षेत्र को भी न्याय मिलेगा।