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मुख्यमंत्री के जनपद में लोकतंत्र की अनसुनी आवाज़ लोहाघाट ब्लॉक प्रमुख कार्यालय के सामने क्षेत्र पंचायत सदस्यों का धरना
चंपावत (उत्तराखंड)
प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जनपद चंपावत के विकासखंड लोहाघाट में लोकतंत्र की जड़ों पर चोट करती तस्वीरें सामने आई हैं। यहां क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों को अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए धरने पर बैठना पड़ रहा है।
यह धरना विकासखंड लोहाघाट स्थित ब्लॉक प्रमुख कार्यालय के ठीक सामने दिया जा रहा है।
धरना क्यों दिया जा रहा है? (बैनर में स्पष्ट संदेश)
धरना स्थल पर लगाए गए बैनर में साफ़ लिखा गया है
क्षेत्र पंचायत सदस्यों के राज्य, केंद्र एवं अन्य मदों के प्रस्तावों को जानबूझकर स्वीकृति नहीं दी जा रही है।
क्षेत्र के विकास में बाधा डाली जा रही है।
इसी अन्याय के विरोध में यह धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है।
बैनर पर धरना प्रदर्शन और क्षेत्र पंचायत सदस्य एकता जिंदाबाद जैसे नारे दर्ज हैं, जो यह दर्शाते हैं कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि वर्ग की सामूहिक आवाज़ है।
नारों में गूंजा आक्रोश
धरने के दौरान क्षेत्र पंचायत सदस्य लगातार नारे लगा रहे हैं
हम अपना हक़ मांगते हैं, किसी से भीख नहीं मांगते
लोकतंत्र जिंदाबाद
इन नारों ने यह साफ़ कर दिया है कि प्रतिनिधि भीख नहीं, बल्कि अपना वैधानिक अधिकार मांग रहे हैं।
ब्लॉक प्रमुख पर गंभीर आरोप
धरना दे रहे प्रतिनिधियों का आरोप है कि
ब्लॉक प्रमुख उनकी आवाज़ सुनने को तैयार नहीं हैं
विकास प्रस्ताव जानबूझकर रोके जा रहे हैं
केवल उन्हीं प्रतिनिधियों की बात सुनी जा रही है, जो ब्लॉक प्रमुख के राजनीतिक खेमे में शामिल हैं
प्रतिनिधियों का कहना है कि ब्लॉक प्रमुख के चुनाव के समय जो सदस्य विपक्ष में खड़े थे, आज उन्हीं को योजनाओं और विकास से वंचित रखा जा रहा है।
राजनीतिक भेदभाव से विकास बाधित
क्षेत्र पंचायत सदस्यों का आरोप है कि ब्लॉक प्रमुख भारतीय जनता पार्टी से जुड़े होने के कारण सत्ता का इस्तेमाल राजनीतिक द्वेष के तहत कर रहे हैं, जिसका सीधा नुकसान ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल: विपक्ष का विधायक कहां है
इस पूरे मामले में अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है
लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र के विपक्ष के विधायक कहां हैं
जब उनके ही क्षेत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधि धरने पर बैठे हैं, तब उनकी आवाज़ विधानसभा तक क्यों नहीं पहुंच रही
क्या विपक्षी विधायक भी इस मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं?
जनता और क्षेत्र पंचायत सदस्यों का कहना है कि यदि विधायक सक्रिय होते, तो आज जनप्रतिनिधियों को सड़क पर बैठने की नौबत नहीं आती।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
धरना दे रहे प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
सभी क्षेत्र पंचायत सदस्यों के प्रस्तावों को समान रूप से स्वीकृति दी जाए
ब्लॉक प्रमुख को जनप्रतिनिधियों की बात सुनने और संवाद स्थापित करने के निर्देश दिए जाएं
उत्तर ध्वनि न्यूज़ इस गंभीर जनहित के मुद्दे पर
प्रशासन
ब्लॉक प्रमुख
और विपक्ष के विधायक
तीनों की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करेगा और सच्चाई को जनता के सामने लाता रहेगा।