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माघे संक्रान्ति पर शिवकुण्ड स्नान का दिव्य महत्व, लेकिन उपेक्षा का शिकार ऐतिहासिक धरोहर
बैतडी | दशरथचन्द नगरपालिका–04, देवल हाट
बैतडी जनपद के दशरथचन्द नगरपालिका–04 देवल हाट में स्थित ऐतिहासिक शिवकुण्ड माघे संक्रान्ति के पावन अवसर पर श्रद्धा, आस्था और पुण्य का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। पञ्चदेवल शिव धाम एवं सप्तदेवल के समीप स्थित इस शिवकुण्ड में स्नान को गंगास्नान के समान पुण्यदायी माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार माघे संक्रान्ति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दिन शिवकुण्ड में स्नान, दान और पूजा करने से
पापों का नाश
आत्मिक शान्ति
जीवन में सुख-समृद्धि
मोक्ष की प्राप्ति
होती है। यही कारण है कि माघे संक्रान्ति, साउन महीना, महाशिवरात्रि और नवरात्रि के दौरान यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
विवाह से लेकर ब्रतबन्ध तक इसी जल से संस्कार
शिवकुण्ड का पवित्र जल विवाह, ब्रतबन्ध, सत्यनारायण पूजा तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयोग किया जाता है। जनविश्वास है कि यह जल भगवान शिव की जटाओं से प्रवाहित है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
700 वर्ष पुराने ढुङ्गे कुवा और धाराएँ
शिवकुण्ड क्षेत्र में आज भी लगभग 700 वर्ष पुराने ढुङ्गे कुवा (नाउला) और ऐतिहासिक धाराहरू विद्यमान हैं, जो इस स्थल को केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी स्थापित करते हैं।
आस्था के साथ उपेक्षा संरक्षण की सख्त ज़रूरत
इतना पवित्र और ऐतिहासिक स्थल होने के बावजूद शिवकुण्ड और आसपास के मंदिरों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
जीर्ण-शीर्ण संरचनाएँ
साफ-सफाई का अभाव
संरक्षण और प्रचार की कमी
यदि समय रहते इसके संरक्षण, सौंदर्यीकरण और व्यवस्थापन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह अनमोल धरोहर भविष्य में संकट में पड़ सकती है।
धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएँ
स्थानीयवासी मानते हैं कि यदि शिवकुण्ड का समुचित विकास किया जाए, तो
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
स्थानीय रोज़गार सृजन
क्षेत्रीय आर्थिक मजबूती
संभव है।
शिवकुण्ड केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जीवित विरासत है।
माघे संक्रान्तिमा शिवकुण्ड स्नानको धार्मिक महत्त्व, तर संरक्षणको अभाव चिन्ताजनक
बैतडी | दशरथचन्द नगरपालिका–04, देवल हाट
बैतडी जिल्लाको दशरथचन्द नगरपालिका–04 देवल हाटमा अवस्थित ऐतिहासिक शिवकुण्ड माघे संक्रान्तिका अवसरमा श्रद्धा र आस्थाको प्रमुख केन्द्र बनेको छ। पञ्चदेवल शिव धाम तथा सप्तदेवल नजिक रहेको यस शिवकुण्डमा स्नान गर्दा गंगास्नान सरह पुण्य प्राप्त हुने धार्मिक विश्वास रहिआएको छ।
माघे संक्रान्तिको दिन सूर्य मकर राशिमा प्रवेश गर्ने भएकाले यस दिन स्नान, दान र पूजा गर्नाले
पाप नाश
आत्मिक शान्ति
जीवनमा समृद्धि
मोक्ष प्राप्ति
हुने मान्यता छ। त्यसैले माघे संक्रान्ति, साउन महिना, महाशिवरात्रि र नवरात्रिमा यहाँ भक्तजनको ठूलो भीड लाग्ने गर्दछ।
धार्मिक संस्कारमा शिवकुण्डको जल
विवाह, ब्रतबन्ध, सत्यनारायण पूजा लगायतका धार्मिक कार्यमा शिवकुण्डको पवित्र जल प्रयोग गर्ने परम्परा छ। यस जललाई भगवान शिवको जटाबाट बगेको पवित्र जल मानिन्छ।
७०० वर्ष पुराना ढुङ्गे कुवा (नाउला) र धाराहरू
शिवकुण्ड क्षेत्रमा झन्डै ७०० वर्ष पुराना ढुङ्गे कुवा र ऐतिहासिक धाराहरू रहेका छन्, जसले यस स्थानको ऐतिहासिक र सांस्कृतिक महत्त्व झल्काउँछ।
पवित्रता भए पनि दुर्दशा
यति ठूलो धार्मिक महत्व हुँदाहुँदै पनि शिवकुण्ड र आसपासका मन्दिरहरूको अवस्था दुर्दशाग्रस्त छ। संरक्षण, व्यवस्थापन र पूर्वाधार विकासको तत्काल आवश्यकता देखिएको छ।
धार्मिक पर्यटन विकासको सम्भावना
यदि शिवकुण्डको संरक्षण र प्रवर्द्धन गरियो भने,
धार्मिक पर्यटन प्रवर्द्धन
स्थानीय रोजगारी
क्षेत्रीय विकास
मा ठूलो योगदान पुग्नेछ।
शिवकुण्ड आस्थाको केन्द्र मात्र होइन, बैतडीको पहिचान हो। यसको संरक्षण आजको आवश्यकता हो।