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बैतड़ी में सहस्त्रलिंग धाम और पाताल भुमेश्वर गुफा बने आकर्षण का केंद्र, विद्यालय ने मनाया 70वां स्थापना दिवस
नेपाल के बैतड़ी जिले में धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की महत्ता एक बार फिर चर्चा में है। देवलहाट स्थित सहस्त्रलिंग धाम और सुर्नया–२ स्थित पाताल भुमेश्वर धाम पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं, जिले के प्रतिष्ठित श्री वीरेंद्र माध्यमिक विद्यालय शाहिलेक ने 70 वर्ष की यात्रा पूर्ण कर 71वें वर्ष में प्रवेश किया।
सहस्त्रलिंग धाम: धार्मिक और पर्यटकीय महत्व स्थानीय समाजसेवियों के अनुसार सहस्त्रलिंग धाम में सावन महीने में दर्शन करने वालों की भारी भीड़ उमड़ती है। माना जाता है कि यहां दर्शन करने से मनोकामना पूर्ण होती है। धाम में स्थित प्राचीन शिवलिंग पर हजारों छोटे-छोटे लिंगों की आकृतियाँ उकेरी गई हैं, जो भगवान शिव के 1008 स्वरूपों का प्रतीक मानी जाती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रचार–प्रसार, संग्रहालय निर्माण, तथा सड़क सुधार की कमी के कारण यह महत्त्वपूर्ण स्थल ओझल में पड़ा हुआ है। विकास कार्यों, होमस्टे और पर्यटन सुविधा बढ़ाने की मांग की जा रही है।
पाताल भुमेश्वर धाम: नेपाल की सबसे गहरी प्राचीन गुफा घोषित अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम ने पाताल भुमेश्वर गुफा को नेपाल की सबसे गहरी प्राचीन गुफा घोषित किया है। फ्रांसीसी विशेषज्ञ मोरिस डुसेन के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में गुफा की गहराई 160 मीटर बताई गई है। यह स्थल स्वस्थानी व्रतकथा और महादेव–सती की कथा से जुड़ा हुआ है। गुफा के भीतर देवद्वार, धर्मद्वार, मोक्षद्वार और पापद्वार स्थित हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र को संरक्षित कर पर्यटन के रूप में विकसित किया जाए तो यह आंतरिक एवं बाह्य पर्यटन का प्रमुख गंतव्य बन सकता है।
विद्यालय का स्थापना दिवस इधर, बैतड़ी जिले का प्रतिष्ठित श्री वीरेंद्र माध्यमिक विद्यालय शाहिलेक ने 70 वर्ष पूरे किए। विद्यालय परिसर में पूजा–पाठ, दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम मनाया गया। पूर्व विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों ने विद्यालय को शिक्षा की जननी कहते हुए सम्मान व्यक्त किया और शिक्षकों को पुष्पगुच्छा देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम जय मां सरस्वती के जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न हुआ।
नेपालीमा समाचार
बैतडीमा सहस्त्रलिङ्ग धाम र पाताल भुमेश्वर गुफा आकर्षण विद्यालयले मनायो ७०औं स्थापना दिवस
नेपालको बैतडी जिल्लामा अवस्थित धार्मिक तथा ऐतिहासिक स्थलहरू पुनः चर्चा र आकर्षणको केन्द्र बनेका छन्। देवलहाटको सहस्त्रलिङ्ग धाम र सुर्नया–२ को पाताल भुमेश्वर धाम मा श्रद्धालु तथा पर्यटकको चहलपहेल बढ्दै गएको छ। यता, जिल्लाको प्रतिष्ठित श्री वीरेन्द्र माध्यमिक विद्यालय शाहिलेक ले ७० वर्ष पूर्ण गर्दै ७१औं वर्षमा प्रवेश गरेको छ।
सहस्त्रलिङ्ग धाम: धार्मिक तथा पर्यटकीय धरोहर स्थानीय समाजसेवीका अनुसार साउन महिनामा सहस्त्रलिङ्ग दर्शन गर्नेको भीड लाग्ने गर्छ। यहाँ दर्शन गरेमा मनोकामना पूरा हुने जनविश्वास छ। धाममा रहेको प्राचीन शिवलिङ्गमा हजारौं स–साना लिङ्गाकृतिहरू कुँदिएका छन्, जसलाई भगवान शिवका १००८ स्वरूपको प्रतीक मानिन्छ।
सङ्ग्रहालय, पहुँच मार्ग र प्रचार–प्रसारको अभावका कारण यो महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल ओझेलमा परेको स्थानीयहरूको गुनासो छ। संरक्षण, होमस्टे तथा पर्यटन प्रवर्द्धनका मागहरू बढिरहेका छन्।
पाताल भुमेश्वर धाम: नेपालकै सबैभन्दा गहिरो गुफा अन्तर्राष्ट्रिय विशेषज्ञ टोलीले पाताल भुमेश्वर गुफालाई नेपालकै सबैभन्दा गहिरो प्राचीन गुफा भएको पुष्टि गरेको छ। फ्रान्सेली विशेषज्ञ मोरिस दुसेन नेतृत्वको अध्ययनअनुसार गुफाको गहिराइ १६० मिटर रहेको छ। यो स्थल स्वस्थानी व्रतकथा तथा महादेव–सतीसँग सम्बन्धित किम्बदन्तीमा आधारित छ। गुफाभित्र देवद्वार, धर्मद्वार, मोक्षद्वार र पापद्वार रहेका छन्।
विशेषज्ञहरूले यस क्षेत्रको संरक्षण र विकास भएमा यो आन्तरिक तथा बाह्य पर्यटनको आकर्षक गन्तव्य बन्न सक्ने बताएका छन्।
विद्यालयको स्थापना दिवस यसै बीच, बैतडीको श्री वीरेन्द्र माध्यमिक विद्यालय शाहिलेक ले ७० वर्षको यात्रा पूरा गर्दै ७१औं वर्षमा प्रवेश गरेको छ। विद्यालय प्राङ्गणमा पूजा–पाठ, दीप प्रज्वलन, सरस्वती वन्दना सहित कार्यक्रम सम्पन्न भयो। पूर्वविद्यार्थी तथा स्थानीयहरूले विद्यालयलाई शिक्षाको जननी भन्दै सम्मान व्यक्त गरे र शिक्षकहरूलाई पुष्पगुच्छा अर्पण गरियो।
कार्यक्रम “जय माँ सरस्वती” का नारा र वैदिक मन्त्रोच्चारसहित सम्पन्न भएको विद्यालय स्रोतले जनाएको छ।