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निगलासैनी दुधकुण्ड : धार्मिक आस्था र पौराणिक विश्वासले उजिल्याएको हिन्दू तीर्थस्थल
नेपाल
दशरथचन्द नगरपालिका–१, गुरुखोला–कलौन क्षेत्रमा अवस्थित निगलासैनी दुधकुण्ड पछिल्ला वर्षहरूमा धार्मिक आस्था, पौराणिक विश्वास र सांस्कृतिक महत्त्वका कारण चर्चित हिन्दू तीर्थस्थलका रूपमा उदाउँदै आएको छ। प्राकृतिक सुन्दरता र पौराणिक महत्व बोकेको यो स्थान विकास र व्यवस्थापनको प्रतीक्षामा रहेको स्थानीयहरूको भनाइ छ।
पवित्र स्नानबाट धार्मिक यात्रा शुरू
स्थानीय परम्परा अनुसार दुधकुण्डमा स्नान नगरी धार्मिक यात्रा प्रारम्भ गर्न नहुने मान्यता अझै जीवित छ। यही कुण्डको जललाई अत्यन्त पवित्र मानिँदै निगलासैनी मन्दिरमा जलाभिषेक गरिन्छ। दुधकुण्डकै जल र स्थानीय सामग्री प्रयोग गरी पकाइने ‘दूध हवि’ भगवानलाई अर्पण गरिन्छ र प्रसादस्वरूप ग्रहण गरिन्छ।
पुराना बासिन्दाहरूले सुनाउने दैवी कथाअनुसार—देहिमाण्डौमा लिङ्ग स्नान गराउँदा कुण्डबाट दूधजस्तै सेतो धारा निस्कने गर्थ्यो भन्ने विश्वास आज पनि रहेको छ, जसले दुधकुण्डलाई चमत्कारी स्थानका रूपमा प्रस्तुत गरेको छ।
विकासको अभाव, सम्भावना अपार
धार्मिक पर्यटनको अपार सम्भावना भए पनि यातायात सुविधा कमजोर, जीर्ण सडक, सूचनापटिकाको अभाव र सरकारी ध्यान नपुग्दा क्षेत्र अपेक्षित उचाइमा पुग्न सकेको छैन।
स्थानीय पत्रकार रमेश परियारका अनुसार,
राज्यले प्राथमिकतामा राखेमा दुधकुण्ड बैतडीको प्रमुख धार्मिक–पर्यटन गन्तव्य बन्न सक्छ, तर सरकारी ध्यान अझै पर्याप्त छैन, उनले बताए।
संरक्षण र प्रचार–प्रसार आवश्यक
धार्मिक अगुवा र स्थानीय नागरिकहरूले अवलोकन मार्ग निर्माण, परिसर संरक्षण, स्वच्छता अभियान, पूजास्थल व्यवस्थापन तथा सरकारी प्रचार–प्रसार तत्काल आवश्यक रहेको सुझाव दिएका छन्।
विशेषज्ञहरूको विश्वास छ—
उचित विकास र व्यवस्थापन गर्न सकिएमा दुधकुण्ड केवल बैतडी मात्र होइन, सुदूरपश्चिमकै प्रमुख हिन्दू तीर्थस्थलका रूपमा परिचित हुन सक्छ।
हिन्दी न्यूज़
निगलासैनी दुधकुंड : आस्था और पौराणिक विश्वास से उजागर प्रमुख हिन्दू तीर्थस्थल
दशरथचन्द नगरपालिका–१, गुरुखोला–कलौन क्षेत्र में स्थित निगलासैनी दुधकुंड धार्मिक आस्था, पौराणिक विश्वास और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण हिन्दू तीर्थस्थल बनकर उभर रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह स्थान विकास और संरचनात्मक सुविधाओं के अभाव में अभी भी अपनी पूर्ण पहचान बना नहीं सका है।
पवित्र स्नान से शुरू होती है धार्मिक यात्रा
स्थानीय परंपरा के अनुसार दुधकुंड में पवित्र स्नान किए बिना धार्मिक यात्रा प्रारंभ नहीं मानी जाती। इसी जल का प्रयोग निगलासैनी मंदिर में जलाभिषेक के लिए किया जाता है। दुधकुंड के जल और स्थानीय सामग्री से बनायी जाने वाली ‘दूध हवि’ (खीर) भगवान को अर्पित की जाती है और प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है।
पुराने निवासियों द्वारा सुनाई जाने वाली कथा के अनुसार—
देहिमाण्डौ में लिंग स्नान कराने पर दुधकुंड से दूध जैसा सफेद जलधारा निकलती थी। इस विश्वास ने दुधकुंड को और अधिक चमत्कारी और पवित्र स्थान के रूप में स्थापित किया है।
धार्मिक महत्व, लेकिन विकास की कमी
धार्मिक पर्यटन की अपार संभावना के बावजूद क्षेत्र में सड़क सुविधा कमजोर है, संकेतक बोर्डों की कमी है और सरकारी प्रचार–प्रसार न होने से यह स्थल उपेक्षित बना हुआ है।
स्थानीय पत्रकार रमेश परियार कहते हैं,
यदि सरकार इस क्षेत्र को प्राथमिकता दे, तो दुधकुंड बैतड़ी का प्रमुख धार्मिक–पर्यटन स्थल बन सकता है, लेकिन अभी भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
संरक्षण और विकास की आवश्यकता
धार्मिक नेताओं, स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों ने दुधकुंड क्षेत्र में अवलोकन मार्ग निर्माण, परिसर संरक्षण, स्वच्छता अभियान, पूजा स्थल प्रबंधन और सरकारी स्तर पर प्रचार–प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों का विश्वास है—
यदि उचित विकास किया जाए तो दुधकुंड न केवल बैतड़ी बल्कि पूरे सुदूरपश्चिम क्षेत्र का एक प्रमुख हिन्दू तीर्थस्थल बन सकता है।