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नंदा गौरा योजना की अंतिम तिथि 20 दिसंबर तक बढ़ी कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या का निर्देश
चंपावत
नंदा गौरा योजना का लाभ लेने के इच्छुक पात्र लाभार्थियों को राहत देते हुए उत्तराखंड सरकार ने आवेदन की अंतिम तिथि 30 नवंबर से बढ़ाकर अब 20 दिसंबर 2025 कर दी है। यह निर्णय कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के निर्देश पर लिया गया, ताकि अधिक से अधिक बेटियों को योजना का लाभ मिल सके।
मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि योजना के तहत कन्या जन्म आधारित लाभ तथा कक्षा 12 उत्तीर्ण करने पर मिलने वाली सहायता राशि हेतु अब तक 30,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। जनसंपर्क कार्यक्रमों के दौरान लोगों ने समय पर आवेदन न कर पाने की समस्या बताई, जिसके बाद सरकार ने तिथि बढ़ाने का निर्णय लिया।
उन्होंने आगे बताया कि 21 से 31 दिसंबर के बीच प्राप्त आवेदनों में सुधार का अवसर भी दिया जाएगा। यह समय सीमा अंतिम होगी, इसलिए सभी पात्र अभ्यर्थियों से अपील है कि वे निर्धारित समय के भीतर आवेदन अवश्य करें।
नंदा गौरा योजना राज्य सरकार की बेटी की शिक्षा एवं विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। समय पर आवेदन सुनिश्चित होने से योजना का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुँच सकेगा।
पूर्णागिरि धाम में हेली सेवा का मार्ग प्रशस्त — चूका में हेलीपैड निर्माण को मंजूरी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ऐतिहासिक सौगात
पूर्णागिरि धाम में तीर्थयात्रियों को आधुनिक, सुरक्षित और तीव्र परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तराखंड सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा संख्या 165/2023 के अंतर्गत चूका क्षेत्र में हेलीपैड निर्माण परियोजना को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिल गई है।
परियोजना हेतु कुल ₹187.95 लाख की मंजूरी दी गई है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पहली किस्त 60% (₹112.77 लाख) जारी करने की अनुमति प्रदान की गई है।
सरकार का यह निर्णय पूर्णागिरि धाम की यात्रा को सालभर सुरक्षित एवं सुगम बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर रहने वाली यात्रा में अब हेली सेवा के माध्यम से आधुनिक और त्वरित पहुँच संभव हो सकेगी।
हेलीपैड निर्माण से
पर्यटन को बढ़ावा
स्थानीय युवाओं को रोजगार
आपदा प्रबंधन में त्वरित प्रतिक्रिया
चूका एवं पूर्णागिरि घाटी क्षेत्र का आर्थिक विकास
जैसे लाभ मिलने की उम्मीद है।
निर्माण पूरा होने के बाद पूर्णागिरि धाम की यात्रा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सहज एवं आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।