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शहीद की अंतिम विदाई के दिन विधायक और पुलिस अधिकारी में विवाद, शोकसभा में गरमाहट
चंपावत पाटी।
जम्मू–कश्मीर के पुंछ में देश सेवा के दौरान शहीद हुए अग्निवीर दीपक सिंह का पार्थिव शरीर 24 नवंबर को जब उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरा क्षेत्र शोक और सम्मान में डूब गया। हजारों ग्रामीण और जनप्रतिनिधि अंतिम विदाई देने पहुंचे।
इसी दौरान एक ऐसा विवाद सामने आया जिसने शहीद की अंतिम यात्रा के माहौल को प्रभावित कर दिया।
श्रद्धांजलि स्थल पर विधायक और पुलिस अधिकारी के बीच कहासुनी
सूत्रों के अनुसार शहीद के पार्थिव शरीर को अंतिम सलामी देने पहुंचे लोहाघाट के विधायक ने कार्यक्रम के दौरान मौजूद एक पुलिस अधिकारी से कथित रूप से नाराज़गी जताते हुए कहा
तूने मुझे नमस्कार क्यों नहीं किया
पुलिस टीम का कहना है कि
शोकसभा में नमस्कार जैसी औपचारिकताओं का समय नहीं होता। सभी लोग शहीद को सलामी देने में व्यस्त थे।
शहीद की अंतिम विदाई के बीच बढ़ा तनाव, ग्रामीणों में नाराज़गी
पार्थिव शरीर के सामने हुए इस विवाद से ग्रामीणों में असहज माहौल बन गया।
लोगों का कहना था कि
जहाँ पूरा क्षेत्र शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल था, वहां किसी भी जनप्रतिनिधि का इस तरह का व्यवहार ठीक नहीं है।
ब्लॉक प्रमुख ने किया बीच-बचाव
स्थिति तनावपूर्ण होती देख पाटी ब्लॉक प्रमुख ने तुरंत आगे आकर दोनों पक्षों को शांत कराया।
ग्रामीणों के अनुसार यदि समय पर बीच-बचाव न किया जाता तो स्थिति और बिगड़ सकती थी।
ग्रामीणों के सवाल एक वर्दी का सम्मान, दूसरी का अपमान क्यों
ग्रामीणों और युवाओं में यह चर्चा तेज हो गई
विधायक एक वर्दी (सेना) को सलाम देने आए, लेकिन वहीं दूसरी वर्दी (पुलिस) का अपमान क्यों कर रहे हैं
पूर्व सैनिकों ने भी इस घटना को शहीद की शोकसभा के प्रति अनादर बताया।
विधायक पक्ष की चुप्पी कॉल काटा, निजी सचिव का फोन स्विच ऑफ
PSR उत्तर ध्वनि न्यूज़ ने जब इस विवाद पर विधायक की प्रतिक्रिया लेनी चाही, तो उन्होंने कुछ समय का हवाला देकर फोन काट दिया।
उनके स्थानीय प्रतिनिधि ने कहा
मुझे इस विषय की जानकारी नहीं है।
जबकि निजी सचिव का फोन स्विच ऑफ मिला।
पुलिस का पक्ष
पुलिस सूत्रों ने बताया
हम शहीद को अंतिम सलामी दे रहे थे। शोकसभा में किसी से नमस्कार की उम्मीद रखना स्थितियों से मेल नहीं खाता।
ग्रामीणों का आक्रोश शहीद की अंतिम यात्रा की गरिमा भंग हुई
ग्रामीणों ने इसे अत्यंत दुखद और अस्वीकार्य बताया।
लोगों ने कहा
विधायक को जनता इसलिए चुनती है कि वे संवेदनशील और जिम्मेदार हों। शहीद की विदाई में इस तरह की बहस करना गलत संदेश देता है।
मामला तेजी से सुर्खियों में
शहीद के अंतिम संस्कार वाले दिन हुए इस विवाद ने पूरे क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश को जन्म दिया है।
जनता का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को ऐसे अवसरों पर ज्यादा गरिमा, संयम और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।