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जिले में बाल-सुरक्षा, सड़क विकास, युवा रोजगार व संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं की चार बड़ी पहलें
चम्पावत जिले में शासन, प्रशासन और विभिन्न विभागों द्वारा जनहित से जुड़ी चार महत्वपूर्ण गतिविधियाँ संपन्न हुईं, जिनमें बाल संरक्षण जागरूकता, सड़क निर्माण स्वीकृतियाँ, युवा आत्मनिर्भरता और घर जाकर दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने जैसी मानवीय पहलें शामिल रहीं।
बाल अधिकार एवं सुरक्षा पर जागरूकता संगोष्ठी
आदर्श राजकीय बालिका इंटर कॉलेज चम्पावत में उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बर्नवाल की अध्यक्षता में “बाल अधिकार एवं सुरक्षा” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई।
विशेषज्ञों ने बच्चों की मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक सुरक्षा, पोक्सो एवं जे.जे. अधिनियम, साइबर सुरक्षा, नशा-निरोध, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, तथा न्याय एवं संरक्षण तंत्र पर विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, शिक्षक व छात्राएँ उपस्थित रहीं।
मुख्यमन्त्री की दो महत्वपूर्ण सौगात—अमोड़ा मोटर मार्ग एवं बनबसा सड़क सुधार को स्वीकृति
जिले में संपर्क और अवसंरचना सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने दो प्रमुख सड़क परियोजनाओं को प्रशासनिक व वित्तीय मंजूरी प्रदान की है।
अमोड़ा–पल्सो कलजाख मोटर मार्ग (5.000 किमी) के द्वितीय चरण हेतु
₹169.17 लाख की स्वीकृति।
बनबसा क्षेत्र की आंतरिक सड़कों के सुधारीकरण (6.825 किमी) हेतु
₹393.91 लाख की मंजूरी।
इन परियोजनाओं से परिवहन सुगम होगा एवं शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूती मिलेगी।
कठनौली के युवा रोहित महर मत्स्य पालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल
मुख्यमंत्री योजनाओं के प्रभाव से जनपद के ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। ग्राम कठनौली के युवा रोहित सिंह महर ने वर्ष 2022 में मत्स्य पालन योजना के तहत 50% सब्सिडी पर क्लस्टर तालाब निर्माण कर आज ₹25,000–30,000 प्रतिमाह की स्थायी आय प्राप्त कर रहे हैं।
वे क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।
घर जाकर दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी—सीएमओ की मानवीय पहल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग की विशेषज्ञ टीम ने टनकपुर के पूर्णागिरि क्षेत्र में रह रही 23 वर्षीय दिव्यांग बालिका के घर पहुँचकर दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया।
बालिका स्किज़ोफ्रेनिया व लगभग 60% दिव्यांगता के कारण अस्पताल आने में असमर्थ थीं। अब उन्हें सरकारी योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा लाभ और उपचार सुविधाएँ प्राप्त होंगी।
यह पहल विभाग की संवेदनशील और जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा का उदाहरण है।