🔊
कुमाऊँनी भाषा में भागवत कथा से श्रद्धालु हो रहे भावविभोर
सम्पादक – PSR, उत्तरध्वनी
चंपावत।
प्रसिद्ध नागनाथ मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए एक अद्वितीय अनुभव बन गई है। पुराणों के मर्मज्ञ एवं लोकप्रिय कथा वाचक आचार्य प्रकाश कृष्ण शास्त्री अब कथा का वाचन कुमाऊँनी भाषा में कर रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और सनातन धर्म में निहित प्रकृति के विराट स्वरूप से जोड़ना है। आचार्य श्री की सरल, सहज और प्रभावशाली कुमाऊँनी भाषा में प्रस्तुति ने न केवल श्रद्धालुओं का मन मोह लिया है, बल्कि उनकी कथा में रुचि भी लगातार बढ़ रही है।
आचार्य श्री का कहना है कि—
आज बच्चों को शिक्षा से अधिक संस्कारों की आवश्यकता है। संस्कार हमें आदर्श और सनातन परंपराओं में बांधते हैं। माता-पिता में ईश्वर का रूप देखना, पीपल के पेड़ को जल देकर पर्यावरण का संदेश देना और बड़ों का सम्मान करना—ये ही जीवन को आलोकित करते हैं।"
उन्होंने पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे हमारी सामाजिक व्यवस्था कमजोर हुई है, और समाज में सनातन मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए सभी को अपने-अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे।
फोटो : भागवत कथा का वाचन करते हुए आचार्य प्रकाश कृष्ण शास्त्री।