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लगातार कई दिनों से मायावती के जंगल में गूंज रही है ‘बंगाल टाइगर’ की गर्जना
उतर ध्वनि न्यूज पीएसआर
डीएफओ ने की पुष्टि, वन विभाग ने शुरू की गश्त
लोहाघाट।
वन पंचायत मायावती के घने जंगलों में पिछले कई दिनों से ‘बंगाल टाइगर’ की गर्जना से इलाके में दहशत का माहौल है। यहां स्थित धर्मार्थ चिकित्सालय के सामने दिनदहाड़े टाइगर की दहाड़ सुनाई देने की बात स्थानीय लोग और साधु-संत लगातार कर रहे हैं।
चिकित्सालय के प्रभारी स्वामी एकदेवानंद जी महाराज ने बताया कि कई दिनों से बाघ की गर्जना बहुत नजदीक से सुनाई दे रही है। इस आवाज की रिकॉर्डिंग वन विभाग को भी भेजी गई। वहीं, वन पंचायत मायावती के सरपंच स्वामी सूहृदयानंद जी महाराज ने जंगल में गोली चलने जैसी आवाजें सुनने की बात भी कही, जिसके बाद वन विभाग ‘एक्शन मोड’ में आ गया।
डीएफओ नवीन चंद्र पंत ने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर टाइगर की दहाड़ सुनी और पुष्टि की कि यह वास्तव में ‘बंगाल टाइगर’ की ही आवाज है। इसके बाद वन विभाग ने चंपावत, लोहाघाट और भिंगराणा वनराजी क्षेत्र के मायावती से मंच तक के जंगल में कैमरा ट्रैप लगाने का निर्णय लिया है, ताकि बाघ की लोकेशन और संख्या का पता लगाया जा सके।
वन विभाग के लिए यह जंगल बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां तीन रेंजों के अलावा काली कुमाऊं रेंज के भी कर्मचारी बारी-बारी से गश्त कर रहे हैं। जोंक (लीच) के प्रकोप के कारण गश्त में कठिनाइयां हैं, लेकिन कर्मचारी अपने दायित्व निभा रहे हैं।
डीएफओ के अनुसार, वन पंचायत मायावती उत्तराखंड का ऐसा मॉडल और मानवरहित सघन वन है, जहां प्राकृतिक चक्र का संतुलन, जैव विविधता और पर्यावरण की मौलिकता सुरक्षित है। यहां वन्यजीवों का अपना खुला संसार है।