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जिलाधिकारी मनीष कुमार जनता के सच्चे अभिभावक, जिनकी कार्यशैली बनी चम्पावत की पहचान ऐसे जिलाधिकारी कहीं नहीं देखे जनता का मानना है कि वे जिले की चिंता अपने परिवार जैसी करते हैं।
चम्पावत,
बरसात की रात हो या कठिन परिस्थितियाँ, जब जनता चैन की नींद सो रही थी, तब जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार स्वांला राजमार्ग पर पहुँचकर जनता की सुविधा और सुरक्षा का जिम्मा निभा रहे थे। देर रात का यह निरीक्षण उनकी कर्तव्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और जनसेवा भाव का सजीव प्रमाण है।
जनता की आवाज
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा जिलाधिकारी हमने आज तक कहीं नहीं देखा। वे केवल आदेश देने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि जनता के सच्चे अभिभावक हैं। वे जिले की चिंता उसी तरह करते हैं जैसे कोई मुखिया अपने परिवार की करता है। उनकी कार्यशैली से हर नागरिक को भरोसा और आत्मविश्वास मिलता है।
मनीष कुमार की खासियतें
हमेशा जमीनी हकीकत देखने स्वयं मौके पर पहुँचना।
बरसात और रात जैसी कठिन परिस्थितियों में भी कर्तव्य निर्वहन से पीछे न हटना।
जनता की असुविधा को कम से कम करने पर विशेष ध्यान।
अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्य की गति और गुणवत्ता पर कोई समझौता न करने के निर्देश।
जिले के हर छोटे-बड़े काम को व्यक्तिगत रूप से देखने की दूरदर्शी कार्यशैली।
जनता का मानना है
जिलाधिकारी मनीष कुमार जैसे अधिकारी किसी जिले के लिए सौभाग्य से कम नहीं हैं।
वे हर नागरिक की चिंता ऐसे करते हैं जैसे अपने परिवार की।
उनके नेतृत्व में चम्पावत जिले का भविष्य उज्ज्वल और सुरक्षित है।
निष्कर्ष
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने यह साबित किया है कि प्रशासनिक पद केवल आदेश देने के लिए नहीं होता, बल्कि जनता की सेवा और समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी मानकर जीने का नाम है। चम्पावत की जनता उन्हें आज एक अधिकारी से बढ़कर परिवार का हिस्सा मानती है।