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भारत-नेपाल सीमा पर फसल चौपट: बारिश और जंगली जानवरों ने मारा डंक, ग्रामीण बोले – हमें चाहिए मुआवजा और तारबाड़
चंपावत। सीमांत चंपावत जिले के विकासखंड लोहाघाट अंतर्गत भारत-नेपाल सीमा से लगे महाकाली नदी किनारे बसे ग्राम पासम के ढांडल तोक के ग्रामीण इस समय गहरी चिंता में हैं। लगातार हुई बारिश और जंगली जानवरों के हमले ने उनकी मेहनत की पूरी फसल चौपट कर दी है। मडुवा और धान की खेती पर ही आश्रित इन ग्रामीणों के सामने अब रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
करीब 15 परिवार यहां खेती को ही जीवनयापन का जरिया मानते हैं। प्रभावित कृषक दीवान सिंह का कहना है हमारा पूरा जीवन खेती पर निर्भर है, लेकिन इस बार बारिश और जंगली जानवरों ने सब बर्बाद कर दिया। अब परिवार पालना मुश्किल हो रहा है।
वहीं कालू सिंह कहते हैं हम सरकार और जिला अधिकारी महोदय से हाथ जोड़कर मांग करते हैं कि हमें फसल नुकसान का मुआवजा दिया जाए और गांव में तारबाड़ की व्यवस्था कराई जाए।
बहादुर सिंह ने भी अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा हर साल जंगली जानवर हमारी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं हुए तो खेती करना नामुमकिन हो जाएगा।
इसी प्रकार धन सिंह का कहना है हमारे बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्चा खेती से ही चलता है। फसल खत्म होने के बाद अब हमारी हालत बेहद खराब हो चुकी है।
ग्रामीणों ने एक स्वर में जिला प्रशासन से मांग की है कि उन्हें मुआवजा उपलब्ध कराया जाए और भविष्य के लिए तारबाड़ (घेरबाड़) की व्यवस्था की जाए, ताकि वे सुरक्षित होकर खेती कर सकें।
और जब पीएसआर उत्तर ध्वनि न्यूज़ के संपादक ने वहां के पटवारी से संपर्क करना चाहा बार-बार फोन करने पर पटवारी फोन नहीं उठा रही हैं और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि का कहना है कि पटवारी कभी भी फोन नहीं उठाती है ना ही क्षेत्र में आती है
यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो सीमांत क्षेत्र के ये परिवार पलायन के लिए मजबूर हो सकते हैं।