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सीमांत की रीना बनी आत्मनिर्भरता की पहचान दूध उत्पादन से बदल डाली तक़दीर
लोहाघाट (भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र)।
भारत-नेपाल बॉर्डर के छोटे से गाँव डूंगरी बलाना की बेटी रीना मेहता ने यह साबित कर दिया कि संकल्प और आत्मविश्वास के आगे मुश्किलें टिक नहीं पातीं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उन्होंने भैंस पालन और दूध उत्पादन को न केवल अपना रोजगार बनाया, बल्कि पूरे सीमांत क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई पहचान गढ़ दी।
गंगा स्वयं सहायता समूह (मॉडल प्रेरणा संकुल संघ दिगालिचौड़) की सक्रिय सदस्य रीना ने ग्राम संगठन से एक लाख रुपये का ऋण लेकर अच्छी नस्ल की भैंस खरीदी। आज उनकी भैंस से रोजाना 8 से 10 लीटर दूध मिल रहा है। इस दूध से तैयार घी को बेचकर रीना हर महीने 8 से 10 हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं।
रीना मेहता का कहना है
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद आत्मविश्वास की गजब की बढ़ोतरी हुई है। अब इस रोजगार को और बड़ा बनाना है और गाँव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करना है।
सीमांत की शान
रीना मेहता ने यह दिखा दिया है कि
महिलाएं भी सीमांत क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की मिसाल बन सकती हैं।
मेहनत और आत्मविश्वास से छोटे प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं।
दूध उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सशक्त जरिया है।