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महाशिवपुराण कथा के सातवें दिवस पर भगवान श्री गणेश और श्री कार्तिकेय की लीलाओं का वर्णन
जनपद चंपावत विकाश खण्ड लोहाघाट मजपीपल | उत्तरध्वनी संपादक: पुष्कर सिंह राजपूत (PSR)
महाशिवपुराण कथा के सातवें दिवस पर भगवान श्री गणेश और श्री कार्तिकेय की लीलाओं का वर्णन
श्रद्धा और भक्ति के साथ व्यासपीठ से श्री जनार्दन पांडे जी ने किया दिव्य प्रसंगों का सारगर्भित वर्णन
मजपीपल — महाशिवपुराण कथा के अंतर्गत आज सप्तम दिवस पर भगवान श्री गणेश जी के गर्भावस्था से लेकर जन्म तक की दिव्य कथा तथा भगवान श्री कार्तिकेय जी के प्राकट्य एवं लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
कथावाचक व्यास श्री जनार्दन पांडे जी ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि—
> "भगवान शिव की कृपा से जब देवी पार्वती ने अपने शरीर की मैल से बालक गणेश की सृष्टि की, तब यह संकेत था कि ममता और सृजन शक्ति का स्रोत स्वयं नारी है।"
उन्होंने बताया कि भगवान गणेश का जन्म भले ही प्रतीकात्मक रूप से हुआ हो, लेकिन उनका महत्व देवताओं में अग्रणी है। गणपति की 'प्रथम पूज्य' परंपरा का रहस्य भी इसी कथा में निहित है।
इसी क्रम में भगवान श्री कार्तिकेय जी की कथा भी सुनाई गई — उनका जन्म, ज्ञान, बल और तारकासुर वध का प्रेरणादायक प्रसंग।
आयोजन समिति ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इस आध्यात्मिक आयोजन के मुख्य यजमान एवं आयोजक मंडल के अध्यक्ष श्री अमरनाथ बोहरा जी रहे। आयोजन में श्री रघुवीर सिंह बोहरा, श्री विक्रम सिंह बोहरा का भी विशेष सहयोग रहा। सभी ने व्यवस्थाओं को समर्पण भाव से निभाया।
महिलाओं की सहभागिता सराहनीय
भक्ति भाव से ओतप्रोत इस आयोजन में महिलाओं की भागीदारी भी अत्यंत प्रेरणादायक रही।
श्रीमती हीरा देवी, श्रीमती ईश्वरी देवी, श्रीमती रेवती देवी सहित अनेक महिलाएं पूजा-पाठ, भजन कीर्तन और आयोजन प्रबंधन में सतत योगदान देती रहीं।
भक्ति से सराबोर वातावरण
पूरे कथा स्थल में श्रद्धा, भक्ति और संयम का माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भगवान शिव परिवार की लीलाओं का श्रवण कर पुण्य लाभ ले रहे हैं। कथा के साथ भजन-कीर्तन, आरती और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी उत्तम रही।
फोटो कैप्शन (यदि फोटो है तो उपयोग करें):
"महाशिवपुराण कथा में भगवान श्री गणेश एवं कार्तिकेय की लीला सुनाते व्यास श्री जनार्दन पांडे, साथ में यजमान अमरनाथ बोहरा जी व श्रद्धालुगण।"
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