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पंचेश्वर आपदा में जिलाधिकारी मनीष कुमार की क्विक एक्शन कार्यसंस्कृति बनी मिसाल
चंपावत।
पंचेश्वर क्षेत्र में आई आपदा ने एक ओर जहां लोगों को गहरे दुख में डुबो दिया, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की सक्रियता, मानवीय संवेदना और जिम्मेदारी की मिसाल भी पेश की। स्थानीय लोगों का कहना है कि आपदा राहत व बचाव कार्य का ऐसा समर्पण भाव उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।
18 वर्षीय लक्ष्मण चंद भले ही जीवन की जंग हार गया, लेकिन उसे बचाने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। घायल को देहरादून ले जाने के लिए बाकायदा किमतोली गांव में हेलीकॉप्टर तक उतारा गया। मौके पर ही मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत चार लाख रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा गया और शव को सम्मानपूर्वक परिजनों के घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इस दौरान स्वयं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान अपनी टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे।
बुजुर्गों ने कहा कि यहां इससे पहले भी बस हादसे जैसी बड़ी घटनाएं हुईं, लेकिन तब ऐसा मानवीय दृष्टिकोण और त्वरित राहत कार्य कभी नहीं देखा गया।
प्रशासनिक तंत्र में यह बदलाव जिलाधिकारी मनीष कुमार की क्विक एक्शन, क्विक डिसीजन और क्विक रिस्पॉन्स की कार्यसंस्कृति का परिणाम है। अवकाश पर होने के बावजूद उन्होंने लगातार जिला प्रशासन और राज्य सरकार से संपर्क बनाए रखा और राहत-बचाव कार्य की मॉनिटरिंग की।
लोगों ने माना कि पहली बार किसी पीड़ित परिवार को मौके पर ही इतनी जल्दी सहायता राशि मिली, जबकि पहले यह प्रक्रिया हफ्तों तक लंबी खिंचती थी। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर हेलीकॉप्टर की व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन अब हर स्थिति से निपटने के लिए तत्पर है।
टनकपुर–पिथौरागढ़ राजमार्ग इसका दूसरा उदाहरण है। भारी बरसात के बावजूद पहली बार सड़क 24 घंटे से ज्यादा बंद नहीं रही। सड़क बंद होते ही स्वयं जिलाधिकारी रात-दिन मौके पर पहुंचकर मार्ग खोलवाने की निगरानी करते रहे।
जानकारों का कहना है कि अब मॉडल जिले चंपावत के लोगों की तकदीर बदलने का वक्त आ गया है। यहां अब समस्याएं लटकाई या टरकाई नहीं जातीं, बल्कि तुरंत निस्तारित होती हैं।
फोटो। जिलाधिकारी मनीष कुमार