🔊
कफललेक एवं खेतीगाड़ में सड़क से जुड़ते ही गांव को आबाद करने की तैयारी
चंपावत। मानेसर से कफललेक एवं खेतीगाड़ तक सड़क निर्माण का मार्ग खुलते ही यहां के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से सड़क की सुविधा से वंचित इन गांवों के लोग अब अपने घर-आंगन को फिर से आबाद करने की योजना बनाने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसे जिलाधिकारी पहले मिलते तो गांव से पलायन की नौबत ही नहीं आती।
पलायन के कारण वीरान हो चुके गांव में सड़क निर्माण की उम्मीद ने न सिर्फ बुजुर्गों के जीवन में नई ऊर्जा भरी है बल्कि युवाओं के भविष्य की संभावनाओं को भी पंख लगा दिए हैं। खेतीगाड़ गांव चारों ओर पर्याप्त पानी और उपजाऊ भूमि के लिए पहले से ही जाना जाता है, जहां सब्जी, फल-फूल, धान, गेहूं और दुग्ध उत्पादन की भरपूर संभावनाएं रही हैं। अब यहां के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि गांव फिर से हरा-भरा और समृद्ध होगा।
कफललेक गांव में अब भी रह रहे सात परिवार जो पलायन की तैयारी में थे, अब सड़क बनने की आस में अपने घरों में ही रुक गए हैं। स्थानीय ग्रामीण चंद्रशेखर, राम नारायण, पवन जोशी, मथुरा दत्त, राजेश पचौली और किशन बिष्ट का कहना है कि कौन ऐसी उपजाऊ भूमि, शुद्ध वातावरण और घर के शुद्ध उत्पादों को छोड़कर नगर की भीड़ का हिस्सा बनना चाहेगा। निवर्तमान ग्राम प्रधान रमेश सिंह पांडे ने कहा कि जिलाधिकारी मनीष कुमार की पहल से यहां के लोगों में दो माह पहले ही दीपावली जैसी खुशी का माहौल बन गया है।
बॉक्स
तीन माह में ही प्रथम चरण का काम होगा पूरा – अधिशासी अभियंता
लोनिवि लोहाघाट के अधिशासी अभियंता हितेश कांडपाल ने बताया कि गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए प्रथम चरण का कार्य तीन माह में पूरा कर लिया जाएगा तथा आगे की कार्रवाई भी युद्ध स्तर पर जारी रहेगी।
(फोटो कैप्शन – अब अच्छे दिनों की राह देखते, पलायन से वीरान हुए कफललेक एवं खेतीगाड़ गांव)