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पानी के लिए तरस रहा बोरबुंगा गाँव महिलाएँ रोज मीलों दूर से ढो रही हैं पानी
लोहाघाट (चंपावत)। विकासखंड लोहाघाट के गाँव बोरबुंगा (पोस्टऑफिस दीगालीचोड़) में पिछले दो सालों से लोग पेयजल संकट की मार झेल रहे हैं। 2023 में आई अतिवृष्टि और आपदा के बाद यहाँ के अधिकांश प्राकृतिक जलस्रोत क्षतिग्रस्त हो गए थे। लेकिन आज तक समस्या जस की तस बनी हुई है।
गाँव की महिलाओं और बच्चियों को रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी ढोना पड़ता है। सुबह से लेकर शाम तक घड़ों और बर्तनों में पानी लाने के लिए जद्दोजहद करना उनकी दिनचर्या बन गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बार-बार जल संस्थान और प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिले। गर्मियों में हालात और भयावह हो जाते हैं, जब बोराबुंगा के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते हैं।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि पेयजल की कमी से खेती-बाड़ी पर असर पड़ रहा है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और पलायन की नौबत तक आ चुकी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से माँग की है कि बोराबुंगा गाँव में तुरंत स्थायी पेयजल योजना लागू की जाए, ताकि लोग इस भयावह संकट से राहत पा सकें।