🔊
लोहाघाट रीश्वेश्वर महादेव मंदिर में महा शिव पुराण का समापन, जन्माष्टमी पर्व पर भक्तों का उमड़ा सैलाब
लोहाघाट (चंपावत)। सीमांत क्षेत्र लोहाघाट के प्राचीन रीश्वेश्वर महादेव मंदिर में चल रही सात दिवसीय महा शिव पुराण कथा का भव्य समापन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व के अवसर पर हुआ। कथा समापन के साथ ही मंदिर प्रांगण में भक्तों ने देर रात तक भक्ति, भजन और कीर्तन में भाग लिया। इस मौके पर आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धार्मिक पुण्य लाभ अर्जित किया।
मंदिर प्रांगण में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। कथा व्यास आचार्य ने भगवान शिव के गौरव, शिवलिंग की महिमा, पार्वती विवाह, समुद्र मंथन, तथा श्रीकृष्ण जन्म की लीला का रसपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान बार-बार मंदिर परिसर में “हर हर महादेव” और “जय श्रीकृष्ण” के गगनभेदी नारे गूंजते रहे।
शाम होते ही जन्माष्टमी पर्व का उल्लास और बढ़ गया। भक्तों ने झांकी सजाकर नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के भजनों के साथ कान्हा के जन्मोत्सव का स्वागत किया। रात 12 बजे जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का क्षण आया, पूरे मंदिर परिसर में शंखनाद और घंटियों की गूंज से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।
समापन अवसर पर आयोजित भंडारे में स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज़ से आए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भक्ति-भाव से भरे इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
इस अवसर पर मंदिर समिति और क्षेत्रीय जनता ने मिलकर आयोजन को सफल बनाया। आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और बड़ी संख्या में भक्तों की मौजूदगी रही।
धार्मिक उत्सव में एकता का संदेश
महा शिव पुराण और जन्माष्टमी उत्सव का यह संगम क्षेत्र की धार्मिक आस्था और संस्कृति का अद्भुत उदाहरण रहा। आयोजन ने न केवल भगवान शिव और श्रीकृष्ण की भक्ति धारा को एक सूत्र में पिरोया, बल्कि आपसी भाईचारे और सामूहिकता का संदेश भी दिया।