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त्रिस्तरीय चुनाव में निर्दलीय अंकिता बोहरा का दमदार प्रदर्शन — महज़ 2 वोट से चूकीं, लेकिन BJP के दांत खट्टे और कांग्रेस बेअसर
लोहाघाट के दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्र से आकर अंकिता बोहरा ने चुनावी मैदान में उतरते ही साफ संदेश दे दिया कि जनता को कमजोर समझने की भूल न की जाए। उन्होंने अपने संघर्ष, बेबाकी और जनसंपर्क के दम पर भाजपा का पूरा चुनावी गणित हिला दिया।
इस चुनाव में कांग्रेस की हालत और भी पतली रही — उन्होंने तो अपना प्रत्याशी तक नहीं उतारा, जिससे मुकाबला सीधा अंकिता बोहरा और भाजपा प्रत्याशी महेंद्र सिंह ढेक के बीच हुआ। नतीजा इतना करीबी रहा कि प्रदेश सरकार के गलियारों तक में बेचैनी फैल गई।
लोहाघाट की जनता ने अंकिता के प्रदर्शन से यह जता दिया कि अगर इच्छाशक्ति और जनसमर्थन हो, तो सत्ता की बड़ी से बड़ी दीवार भी डगमगाई जा सकती है।