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नई दिल्ली में राष्ट्रीय मंच पर चमका चमोली, फसल विविधीकरण में मिला सम्मान; विजया देवी एकीकृत खेती से कमा रहीं ₹25 हजार प्रतिमाह प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत टिकाऊ कृषि पद्धतियों में उत्कृष्ट कार्य के लिए चमोली सम्मानित, पोखरी की महिला किसान ने सब्जी, फूल, कीवी और एग्रोफोरेस्ट्री को बनाया आय का मजबूत आधार
उत्तराखंड जनपद चमोली।
चमोली। उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली ने कृषि क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के क्रियान्वयन का एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी) में आयोजित कार्यक्रम में चमोली को फसल विविधीकरण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। जनपद की ओर से मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने यह सम्मान ग्रहण किया।
फसल विविधीकरण में बेहतर प्रदर्शन पर मिली पहचान
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत विभिन्न जनपदों के कार्यों का मूल्यांकन किया गया। इसमें चमोली को फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित जिलों में शामिल किया गया। यह उपलब्धि जनपद में कृषि को अधिक विविधतापूर्ण, टिकाऊ और लाभकारी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करती है।
एकीकृत कृषि मॉडल से आत्मनिर्भर बन रहीं विजया देवी
जनपद के विकासखंड पोखरी की प्रगतिशील कृषक विजया देवी ने एकीकृत कृषि पद्धति अपनाकर स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है। ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से उन्होंने सब्जी उत्पादन, पुष्प उत्पादन, एग्रोफोरेस्ट्री और कीवी उत्पादन को एक ही कृषि मॉडल में शामिल किया है। इन गतिविधियों के माध्यम से वह प्रतिमाह लगभग 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
सब्जी और फूलों की खेती से आय के नए अवसर
विजया देवी वर्षभर विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन करती हैं। इससे परिवार की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ नियमित आय के अवसर भी बढ़े हैं। वहीं, पुष्प उत्पादन को अपनाकर उन्होंने खेती से अतिरिक्त आमदनी का रास्ता तैयार किया है। एग्रोफोरेस्ट्री के माध्यम से भूमि की उर्वरता, मिट्टी और नमी के संरक्षण तथा कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
कीवी से जैम और अचार बनाकर मूल्य संवर्धन की पहल
विजया देवी ने कीवी उत्पादन के साथ उसके प्रसंस्करण की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। वह कीवी से जैम और अचार जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर रही हैं। इससे ताजे फल की बिक्री के अतिरिक्त प्रसंस्कृत उत्पादों के जरिए भी आय अर्जित करने की संभावनाएं विकसित हुई हैं। यह पहल स्थानीय कृषि उत्पादों का बेहतर उपयोग करने और कृषि आधारित लघु उद्यम को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
परियोजना से ₹75 हजार की सहायता और ₹1.50 लाख का ऋण
ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत विजया देवी को 75 हजार रुपये की सहायता राशि और 1.50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने संसाधनों से 93,500 रुपये का निवेश किया। परियोजना से मिले सहयोग और स्वयं के निवेश से उन्होंने अपनी कृषि गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित और विविधीकृत स्वरूप दिया।
प्रशिक्षण से बढ़ाया कृषि प्रबंधन का कौशल
विजया देवी ने कृषि प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और एकीकृत कृषि पद्धतियों से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर अपने ज्ञान एवं कौशल को विकसित किया। प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी का उपयोग करते हुए वह उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और आय के नए अवसरों पर भी ध्यान दे रही हैं।
एक फसल पर निर्भरता कम करने का प्रयास
एकीकृत कृषि मॉडल के माध्यम से विजया देवी ने आय के कई स्रोत विकसित किए हैं। सब्जी, फूल, कीवी और एग्रोफोरेस्ट्री को एक साथ जोड़ने से किसी एक फसल पर निर्भरता कम करने और उपलब्ध कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलती है। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में महिला किसानों के लिए स्वरोजगार और टिकाऊ आजीविका का प्रेरक उदाहरण है।
भविष्य में प्रसंस्कृत उत्पादों का विस्तार करने की योजना
विजया देवी भविष्य में कीवी से तैयार होने वाले मूल्यवर्धित उत्पादों की श्रृंखला का विस्तार करने, नई प्रसंस्करण गतिविधियां अपनाने और आसपास के किसानों के साथ अपने अनुभव साझा करने की योजना बना रही हैं। उनका उद्देश्य खेती को केवल आजीविका का साधन न रखकर एक स्थायी, आत्मनिर्भर और लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित करना है।
कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण योजना
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना, सिंचाई और भंडारण सुविधाओं में सुधार करना तथा किसानों की आय और आजीविका को मजबूत बनाना है। योजना के अंतर्गत विभिन्न केंद्रीय और राज्य योजनाओं के समन्वय से स्थानीय कृषि जरूरतों के अनुसार कार्य किए जाते हैं। चमोली को मिला राष्ट्रीय सम्मान और पोखरी की विजया देवी का प्रयास इस बात को रेखांकित करता है कि कृषि में नवाचार, प्रशिक्षण और उचित सहयोग से ग्रामीण आजीविका को मजबूत किया जा सकता है। Cite refs={["turn506156search5","turn506156search6"]}/>
चमोली, उत्तराखंड
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