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चम्पावत में अब तक 24 जिलाधिकारी कार्यकाल दर्ज: प्रशासन की पहचान काम से या राजनीतिक हस्तियों के साथ तस्वीरों से दो पूर्व जिलाधिकारियों की कार्यशैली को करीब से देखा, अब सरकारी अधिकारियों की राजनीतिक तटस्थता पर चर्चा जरूरी।
उत्तराखंड जनपद चंपावत।
जनपद चम्पावत में मैंने दो जिलाधिकारियों—श्री नरेंद्र सिंह भंडारी और श्री नवनीत पांडे—की कार्यशैली को करीब से देखा है। मेरे व्यक्तिगत अनुभव में प्रशासनिक कार्यों के साथ राजनीतिक हस्तियों के साथ तस्वीरें खिंचवाकर उन्हें साझा करने की प्रवृत्ति प्रमुखता से दिखाई नहीं दी। वहीं, आज कुछ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को राजनीतिक व्यक्तियों के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते देखकर यह सवाल उठता है कि सरकारी पद की गरिमा और निष्पक्षता को किस तरह बनाए रखा जाना चाहिए।
चम्पावत जिले का इतिहास: 1997 में हुआ गठन
चम्पावत जिले का गठन 15 सितंबर 1997 को हुआ था। उस समय उत्तराखंड अलग राज्य नहीं बना था। उत्तराखंड राज्य का गठन 9 नवंबर 2000 को हुआ। चम्पावत जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर 2 अक्टूबर 1997 से जिलाधिकारियों की सूची उपलब्ध है। इस सूची में 24 क्रमांकित कार्यकाल दर्ज हैं।
चम्पावत के जिलाधिकारियों की पूरी सूची
जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज नाम और कार्यकाल इस प्रकार हैं:
1. नवीन चंद्र शर्मा— 2 अक्टूबर 1997 से 14 दिसंबर 1999 तक।
2. एस.के. महेश्वरी — 14 दिसंबर 1999 से 5 सितंबर 2001 तक।
3. तारकेंद्र वैष्णव — 5 सितंबर 2001 से 22 अगस्त 2003 तक।
4. गोपाल कृष्ण द्विवेदी— 22 अगस्त 2003 से 14 जून 2004 तक।
5. अमित नेगी— 14 जून 2004 से 1 अप्रैल 2005 तक।
6. दयाल सिंह नाथ — 1 अप्रैल 2005 से 5 मार्च 2006 तक।
7. विनोद कुमार पाठक— 5 मार्च 2006 से 30 अक्टूबर 2006 तक।
8. डॉ. प्रताप सिंह गुसाईं — 30 अक्टूबर 2006 से 5 अक्टूबर 2007 तक।
9. कुनाल शर्मा — 6 अक्टूबर 2007 से 18 नवंबर 2007 तक।
10. रमेश चंद्र पाठक— 18 नवंबर 2007 से 17 जून 2008 तक।
11. हरीताश गुलशन — 18 जून 2008 से 1 नवंबर 2008 तक।
12. अवेंद्र सिंह न्याल— 8 नवंबर 2008 से 16 अगस्त 2010 तक।
13. डॉ. पंकज कुमार पांडे — 16 अगस्त 2010 से 24 सितंबर 2011 तक।
14. आशीष जोशी— 28 सितंबर 2011 से 2 जून 2012 तक।
15. श्रीधर बाबू अद्दांकी — 4 जून 2012 से 28 मई 2013 तक।
16. दीपेंद्र कुमार चौधरी — 1 जून 2013 से 1 जून 2016 तक।
17. डॉ. अहमद इकबाल— 1 जून 2016 से 24 जुलाई 2018 तक।
18. सुरेंद्र नारायण पांडे — 24 जुलाई 2018 से 4 जनवरी 2019 तक।
19. रणवीर सिंह चौहान** — 4 जनवरी 2019 से 4 जुलाई 2019 तक।
20. सुरेंद्र नारायण पांडे— 4 जुलाई 2019 से 15 फरवरी 2021 तक।
21. विनीत तोमर — 15 फरवरी 2021 से 26 अप्रैल 2022 तक।
22. नरेंद्र सिंह भंडारी— 26 अप्रैल 2022 से 25 जुलाई 2023 तक।
23. नवनीत पांडे— 12 अगस्त 2023 से 21 जून 2025 तक।
24. मनीष कुमार— 21 जून 2025 से वर्तमान तक, आधिकारिक सूची के अनुसार।
*स्रोत: चम्पावत जिला प्रशासन की आधिकारिक कलेक्टर सूची। तिथियां वेबसाइट पर दर्ज विवरण के अनुसार हैं। कुछ कार्यकालों के बीच तिथियों में अंतर दिखाई देता है, इसलिए उन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना नियुक्ति संबंधी अतिरिक्त निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।*
सवाल किसी अधिकारी के व्यक्तिगत संबंधों का नहीं, प्रशासनिक निष्पक्षता का है।
सरकारी अधिकारी जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करते हैं, विकास कार्यों का निरीक्षण करते हैं और आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। ऐसे अवसरों पर तस्वीरें खिंचवाना स्वाभाविक है। लेकिन किसी तस्वीर के आधार पर अधिकारी की नीयत या राजनीतिक पक्षधरता तय करना भी उचित नहीं है। असली कसौटी यह होनी चाहिए कि अधिकारी कानून के अनुसार काम कर रहे हैं या नहीं और सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार हो रहा है या नहीं।
[h2]जनता की अपेक्षा: काम में पारदर्शिता, फैसलों में निष्पक्षता।
चम्पावत के नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं, शिकायतों का निस्तारण समय पर हो रहा है या नहीं और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल जनहित में किया जा रहा है या नहीं। अधिकारियों की जवाबदेही इन्हीं ठोस कार्यों से तय होनी चाहिए।
आखिरी सवाल प्रशासन की पहचान क्या होनी चाहिए
जिले में कितने जिलाधिकारी आए और गए, यह प्रशासनिक इतिहास का हिस्सा है। लेकिन जनता के लिए अधिक महत्वपूर्ण यह है कि किस कार्यकाल में क्या काम हुआ, समस्याओं का कितना समाधान हुआ और आम नागरिक को कितना न्याय मिला।
संदेश स्पष्ट है: सरकारी पद की गरिमा, राजनीतिक तटस्थता और जनता के प्रति जवाबदेही इन्हीं से प्रशासन पर भरोसा मजबूत होता है।
उत्तराखंड
PSR उत्तरध्वनि न्यूज़
पुष्कर सिंह राजपूत
ग्राउंड रिपोर्ट | जनता की आवाज
ध्यान दें: यह सूची चम्पावत जिले की है, पूरे उत्तराखंड के सभी जिलाधिकारियों की नहीं। और सूची में कुछ तारीखों के अंतर को देखते हुए, प्रकाशन से पहले जिला प्रशासन से कार्यकालों की पुष्टि कर लेना बेहतर होगा।