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संरक्षण के अभाव में खंडहर बन रहा ऐतिहासिक कुल्लेकोट दरबार 15वीं-16वीं शताब्दी से जुड़ी है धरोहर, चंद राजाओं के शासनकाल की यादें समेटे किला अब उपेक्षा का शिकार
नेपाल
बैतडी। दशरथचंद नगरपालिका-4 में स्थित ऐतिहासिक कुल्लेकोट दरबार (किल्ला) संरक्षण के अभाव में जर्जर होकर अब भग्नावशेष में बदलता जा रहा है। प्राचीन इतिहास की महत्वपूर्ण गवाही देने वाली इस धरोहर की ओर स्थानीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक अपेक्षित ध्यान नहीं दिए जाने से इसके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
इतिहासकार आत्माराम ओझा की पुस्तक नेपाली इतिहास मन्थन में उल्लेख मिलता है कि 15वीं-16वीं शताब्दी के आसपास राजा रानादेव ने कुल्लेकोट को राजधानी बनाकर इस क्षेत्र का शासन संचालित किया था। बताया जाता है कि इस ऐतिहासिक दरबार का निर्माण तत्कालीन चंद राजाओं के समय हुआ था।
गोर्खाली सेना से संघर्ष का भी गवाह
नेपाल एकीकरण के दौरान पृथ्वीनारायण शाह के बाद बहादुर शाह ने अभियान को आगे बढ़ाया। इतिहास के अनुसार डोटी विजय के बाद गोर्खाली सेना महाकाली नदी की सीमा की ओर बढ़ी। इसी दौरान कुल्लेकोट दरबार से जुड़े शासक परिवार के झुलिचंद ने अपनी सैन्य शक्ति के साथ कठपते की ऊंची पहाड़ी पर सैन्य शिविर बनाकर गोर्खाली सेना का मुकाबला किया था। इतिहासकार ओझा के लेखन में इस संघर्ष में गोर्खाली सेना को भारी क्षति होने का उल्लेख मिलता है।
पत्थर बन रहे बच्चों के खेलने का साधन
कभी क्षेत्र की सत्ता और इतिहास का केंद्र रहा कुल्लेकोट आज संरक्षण के अभाव में अपनी पहचान खो रहा है। दरबार में इस्तेमाल किए गए प्राचीन पत्थर बिखरे पड़े हैं और कुछ पत्थरों का उपयोग बच्चों के खेलने तक में हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द संरक्षण नहीं किया गया तो यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह समाप्त हो सकती है।
संरक्षण से विकसित हो सकता है पर्यटन स्थल
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित कुल्लेकोट दरबार का संरक्षण और ऐतिहासिक स्वरूप में पुनर्निर्माण किया जाए तो इसे प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। प्रचार-प्रसार होने से देश-विदेश के पर्यटक यहां पहुंच सकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और क्षेत्र को आर्थिक लाभ मिल सकता है।
स्थानीय लोगों ने सरकार और संबंधित निकायों से कुल्लेकोट दरबार का संरक्षण, पुनर्निर्माण और व्यापक प्रचार-प्रसार कराने की मांग की है।
रिपोर्टर : पुष्कर सिंह राजपूत
PSR उत्तरध्वनि NEWS