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लाखामंडल मंदिर आस्था, रहस्य और चमत्कार का संगम अब सूरत से आए 26 श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
देहरादून। यमुना घाटी के किनारे स्थित प्राचीन और रहस्यमयी लाखामंडल मंदिर एक बार फिर श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर न केवल अपने इतिहास और पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां होने वाले अद्भुत अनुभव श्रद्धालुओं को गहराई से आस्था से जोड़ देते हैं।
सूरत (गुजरात) से पहुंचा श्रद्धालुओं का जत्था
चारधाम यात्रा के अंतर्गत सूरत (गुजरात) से 26 श्रद्धालुओं का एक दल यहां दर्शन हेतु पहुंचा।
यह यात्रा एक विशेष टूर के माध्यम से आयोजित की गई, जिसका नेतृत्व कर रहे हैं
राजू भाई बेकावाला
लगभग 30 वर्षों से चारधाम यात्रा का अनुभव
पूरे भारत में धार्मिक यात्राओं का व्यापक अनुभव
उम्रदराज लेकिन अत्यंत अनुभवी और श्रद्धालुओं के मार्गदर्शक
यह पूरा दल 02 मई 2026 से 11 मई 2026 तक की यात्रा पर है, जिसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम शामिल हैं।
श्रद्धालुओं की सूची (मुख्य नाम)
सूरत एवं अन्य क्षेत्रों से आए प्रमुख श्रद्धालुओं में शामिल हैं
रंजनाबेन राजेंद्रसिंह परमार
नूतनबेन भिखुसिंह परमार
वैशालीबेन राकेश कुमार पटेल
पूनमबेन निकुंजभाई पटेल
निखिल पारेख एवं मेहा पारेख
अशोक कुमार चौहान एवं रचिनी चौहान
भारतीबेन चौहान
रोमानि सुथार, भावना सुथार, महेश कुमार सुथार
हिमांशु कुमार गज्जर एवं हंसाबेन गज्जर
रुद्र त्रिवेदी
शान्वी मिस्त्री, हिनाबेन मिस्त्री
शैलेश पारेख एवं संगीता पारेख
भावना झावेरी (छत्तीसगढ़)
योगेश कुमार बेकावाला, वैशाली दिवावाला
हंसाबेन कनानी, कालूभाई कनानी
प्रभाबेन कोलाडिया एवं नंदलालभाई कोलाडिया
प्रेम लाल, उगमा
कुल यात्री: 26
लाखामंडल: इतिहास और रहस्य
लाखामंडल का अर्थ है असंख्य शिवलिंगों का स्थान।
यहां खुदाई में सैकड़ों शिवलिंग और मूर्तियां मिल चुकी हैं, जिससे यह प्राचीन शिव उपासना केंद्र सिद्ध होता है।
महाभारत से जुड़ी लाक्षागृह कथा
मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां कौरवों ने पांडवों को जलाने के लिए लाक्षागृह बनाया था।
लेकिन पांडवों ने गुप्त सुरंग से बचकर इतिहास रच दिया।
गाय की कथा और रहस्यमयी निशान
लोककथाओं के अनुसार
एक गाय रोज एक स्थान पर दूध छोड़ती थी, जहां खुदाई में यह मंदिर मिला।
मंदिर की दीवारों पर दिखने वाले लाल निशानों को श्रद्धालु गाय के खुर पांव के निशान मानते हैं, हालांकि विशेषज्ञ इसे प्राकृतिक कारणों से जोड़ते हैं।
शिवलिंग का चमत्कार
इस मंदिर का शिवलिंग अत्यंत अद्भुत है
जलाभिषेक करते ही शीशे की तरह चमकता है
श्रद्धालु अपना चेहरा स्पष्ट देख सकते हैं
इसे भक्त भगवान शिव का चमत्कार मानते हैं।
जीवित होने की मान्यता
यहां मौजूद द्वारपाल मूर्तियों के सामने
मृत व्यक्ति को लिटाकर
ॐ नमः शिवाय मंत्र बोलने पर
कुछ समय के लिए जीवित होने की लोकमान्यता भी प्रचलित है।
ASI द्वारा संरक्षित धरोहर
यह मंदिर आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है और प्राचीन भारतीय शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
आस्था का केंद्र बना लाखामंडल
सावन, महाशिवरात्रि और चारधाम यात्रा के दौरान यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
सूरत से आए इस जत्थे ने भी यहां दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभव साझा किया।
निष्कर्ष
लाखामंडल एक ऐसा स्थान है जहां
इतिहास
पौराणिक रहस्य
लोक आस्था
और अद्भुत अनुभव
सभी एक साथ मिलते हैं
और अब देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालु इसे और भी जीवंत बना रहे हैं।
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